नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट लापता लोगन के ममिला में पुलिस के कार्रवाई के लेके बड़ निरदेस देले बा। कोर्ट साफ कहलस कि कवनो आदमी के लापता होखला पs, ओकर उमिर भा लिंग कुछुओ होखे, तुरंत एफआईआर दर्ज करे के होई।
सुप्रीम कोर्ट के ई निरदेस मानव तस्करी रोके, लापता लोगन के जल्दी खोजे आ पीड़ित लोगन के सुरक्षित बरामदगी खातिर महत्वपूर्ण मानल जा रहल बा।

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह आ आर महादेवन के बेंच सब राज्य आ केंद्र शासित प्रदेशन के निरदेस देलस कि कवनो व्यक्ति के लापता होखे के सूचना मिलतही पुलिस तुरंत एफआईआर दर्ज करे।
कोर्ट एह बात पs हैरानी जतवलस कि कुछ राज्यन में ई गलत धारणा बन गइल बा कि पिछिला आदेस खाली लापता लईकल पs लागू होला।
बेंच कहलस कि पिछिला आदेस में इस्तेमाल ‘व्यक्ति’ शब्द के मतलब हर आदमी से बा, चाहे ओकर उमिर कुछुओ होखे भा ऊ महिला होखे चाहे पुरुष।
कोर्ट कहलस- आदेस के गलत मतलब निकाले के कोसिस
5 अगस्त के जारी आदेस में सुप्रीम कोर्ट कहलस कि ओकर पिछिला निरदेस के भाषा बिल्कुल साफ रहे। कोर्ट के मोताबिक, ‘व्यक्ति’ शब्द के दायरा खाली लईकन तक सीमित नइखे।
बेंच के माने के रहे कि कुछ राज्यन के ओर से ई व्याख्या जानबूझके आ गलत नीयत से सामने ले आवल गइल।
कोर्ट साफ कs देलस कि लापता लईकन के संगे-संगे हर लापता वयस्क के ममिला में तुरंत पुलिस कार्रवाई जरूरी बा।
आदेस ना मानला पs मुख्य सचिव आ DGP पs कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट राज्यन आ केंद्र शासित प्रदेशन के चेतावनी देलस कि अगर 22 मई के आदेस के पूरा तरे आ ओकर मूल भावना के संगे पालन ना भइल, तs संबंधित मुख्य सचिव आ पुलिस महानिदेशक (DGP) के खिलाफ अवमानना के कार्रवाई हो सकेला।
अइसन इस्थिति में दुनु अधिकारी के अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होखे के पड़ सकेला। संगही, ओह लोगन से कारण बताओ हलफनामा दाखिल करावल जा सकेला।
हलफनामे में बतावे के होई कि कोर्ट के आदेस के जानबूझके पालन ना करे के आरोप में ओी लोगन के खिलाफ कार्रवाई काहे ना होखे।
लापता होखे के सूचना मिलतही FIR जरूरी
सुप्रीम कोर्ट 22 मई के अपना आदेश में पुलिस स्टेशनन के साफ निरदेस देले रहे कि कवनो व्यक्ति के लापता होखे के जानकारी मिलतही FIR दर्ज करे के होई।
पुलिस के सुरुआती जांच के नाम पs एफआईआर दर्ज करे में देरी ना करे के होई। परिवार के खुद लापता व्यक्ति के खोजे खातिर कहके पुलिस अपना जिम्मेदारी से ना बच सकेले।
कोर्ट के निरदेस के मोताबिक, एफआईआर में व्यक्ति भा बच्चा के अपहरण भा मानव तस्करी से जुड़ल भारतीय न्याय संहिता के प्रावधान सामिल करे के बात कहल गइल रहे, जहां तथ्य ओकर समर्थन करे।
लापता व्यक्ति के सुरुआती घंटा सबसे महत्वपूर्ण
सुप्रीम कोर्ट लापता व्यक्ति के खोजबीन में सुरुआती समय के बहुते महत्वपूर्ण बतवले बा। कोर्ट के मोताबिक, लापता होखला के बाद के सुरुआती घंटा ‘गोल्डन आवर’ होखेला। एह दौरान व्यक्ति के सुरक्षित खोजे के संभावना जादे रहेला।
एही वजह से कोर्ट पुलिस के 24 घंटा इंतजार ना करे के निरदेस देले बा। लापता व्यक्ति के खोजे के प्रक्रिया सूचना मिलतही सुरू करे के होई।
जदि 24 घंटा के भीतर लापता व्यक्ति मिल जाई आ ओकरा के परिवार के सउप दिहल जात बा, तबो पुलिस के जरूरी प्रक्रिया के पालन करे के होई।
मानव तस्करी के शक होखला पs तुरंत विशेष यूनिट के कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ईहो निरदेस देले बा कि जदि पुलिस के लगे कवनो लापता व्यक्ति के ममिला में मानव तस्करी के ठोस आशंका होखे, तs चार महीना पूरा होखे के इंतजार ना करे के होई।
अइसन ममिला के समय रहते विशेष यूनिट के सउपे के निरदेस बा, ताकि जांच आ बचाव के काम तेजी से हो सके।
कोर्ट केंद्र सरकार, राज्य सरकार आ केंद्र शासित प्रदेशन के आपन मानव तस्करी रोधी यूनिट (Anti-Human Trafficking Unit) चार हफ्ता के भीतर पूरा तरे सक्रिय करे के निरदेस दिहल गइल रहे।










