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कविता

अटरिया मोर कहवाँ बनीं (कविता) गणेश नाथ तिवारी विनायक के कलम से

नइखे बाँचल काठ के कोठरिया अटरिया मोर कहवाँ बनीं फेड खूंट झाड़ जंगल, सगरो कटि गइलें माटी के मड़इयाँ जाने, कहवा परइले लागि गइल लोहा के सटरिया…

कनवा अन्हरन्ह कै राजा हौ: राजनीतिक व्यंग्य के कविता

बाजत अब ओकरे बाजा हौ कनवा अन्हरन्ह कै राजा हौ का दी का ली अब के पूछे चलs भले से राहि ना सूझे भाग बनल किस्मत बहुराइल रंगल सियारन के दिन आइल…

माई-बाबूजी (कविता) गणेश नाथ तिवारी ‘विनायक’ के कलम से

बाबू दिन-रात अपना, बचवन के सोंचेले माई मोर लोर कोर,अचरा से पोछेले माई के हियरा,जइसे हउवे गाई बेटवा तs बनि जाला, निपटे कसाई कवनो स्वारथ बिना, बचवा…

बाबूजी-2 (कविता) मैकश के कलम से

घर के जानल पहचानल अनजान बाबूजी हो गइले जइसे कवनों गाछ पुरान बाबूजी घर आंगन दुआर के लाठी रखवार बाबूजी आन्ही रोकत जइसे माटी के देवार बाबूजी…

सूइये तागा जोड़े में उजर गईल जिनिगी (कविता) मैकश के कलम से

कोइला के धाह में ककड़ गईल जिनिगी सूइये तागा जोड़े में उजर गईल जिनिगी लईकाई में हमरो बड़ बड़ कहानी रहे एगो नाय रहे आ छाती भर पानी रहे आन्ही पानी आईल…

विश्व कविता दिवस : कुमार आशू के कलम से

कविता आदमी के आदमियत के पहिचान हवे| एही से एह छौ रस वाला एह सृष्टि में कविता में नौ रस पावल जाला| लेकिन कविता कब आपन रूप पावेले अउर कब ओकर रहल सार्थक…

मनहरण घनाक्षरी (कविता)- गणेश नाथ तिवारी विनायक जी के कलम से

मनहरण घनाक्षरी फगुनी बयार झरे ,लोगवा गुहार करे। धनि मनुहार करे,बाति मोरा मान ली।। बानीं परदेस रवा,चलि आई देस रवा। तनिको ना देर करी,मनवा में ठान…