फीचर डेस्क। आज देवशयनी एकादशी के पावन व्रत रखल जा रहल बा। हिंदू धरम में एकादशी व्रत के बहुते महत्व मानल जाला। हर साल आषाढ़ महीना के शुक्ल पक्ष के एकादशी तिथि के देवशयनी एकादशी मनावल जाला। एह परब के पद्मा एकादशी, आषाढ़ी एकादशी आ हरिशयनी एकादशी के नाम से जानल जाला।
मान्यता बा कि एह दिन से भगवान विष्णु चार महीना खातिर योग निद्रा में चल जालें। एह अवधि के चातुर्मास कहल जाला। चातुर्मास के दौरान कइयन तरे के सुभ आ मांगलिक काम करे से परहेज कइल जाला। भगवान विष्णु देवउठनी एकादशी के दिन जागेलें।
पारण के सुभ समय
एकादशी बरत में पारण माने बरत खोले के समय के खास महत्व होला। शास्त्र अनुसार बरत के पारण द्वादशी तिथि के भीतर करे के चाहीं। हरि वासर समाप्त भइला के बादे बरत खोलल सुभ मानल जाला।
- देवशयनी एकादशी 2026 के पारण 26 जुलाई 2026 के कइल जाई।
- व्रत खोले के सुभ समय: सबेरे 6 बजके 13 मिनट से सबेरे 8 बजके 50 मिनट तक
- एह दिन द्वादशी तिथि के समाप्त होखे के समय दूपहरिया 1 बजके 57 मिनट तक रही।
देवशयनी एकादशी पारण विधि
- पारण के दिन श्रद्धालु के कुछ खास नियम के पालन करे के चाहीं।
- सबेरे नहाके साफ कपड़ा पहिनी।
- भगवान विष्णु के मूर्ति भा तस्वीर के सामने दीया जराईं।
- नारायण जी के तुलसी दल, फूल, फल आ भोग अर्पित करीं।
- भगवान विष्णु के आरती करीं।
- बरत खोले से पहिले ब्राह्मण, गरीब भा जरूरतमंद व्यक्ति के अन्न, धन भा वस्त्र दान करीं।
- तुलसी दल, पंचामृत भा सात्विक भोजन ग्रहण कs के व्रत के पारण करीं।
- पारण के बादो सात्विक भोजन जरूरी
देवशयनी एकादशी के पारण के बादो दिनभर सात्विक भोजन करे के सलाह दिहल जाला। श्रद्धालु लोग प्याज आ लहसुन के सेवन से बचे के कोसिस करेला। धार्मिक मान्यता अनुसार विधि-विधान से देवशयनी एकादशी के व्रत आ पारण करे से भगवान विष्णु के किरपा प्राप्त होला आ जिनगी में सुख-समृद्धि आवेला।









