Ravi Kishan : दिल्ली हाईकोर्ट से सांसद आ अभिनेता रवि किशन के व्यक्तित्व अधिकारन के मिलल बड़हन कानूनी सुरक्षा

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दिल्ली (शुभेंद्र सत्यदेव)। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) अउर डीपफेक नियर आधुनिक तकनीकन के बढ़त गलत इस्तेमाल के बीच, दिल्ली उच्च न्यायालय गोरखपुर के सांसद आ प्रख्यात अभिनेता रवि किशन के व्यक्तित्व अधिकारन (Personality Rights) अउर प्रचाराधिकारन (Publicity Rights) के रक्षा करत एगो बड़हन अंतरिम आदेश जारी कइले बा। न्यायालय उनके नाम, फोटो, आवाज़, सादृश्यता (Likeness), व्यक्तित्व चाहे कवनो दोसर खास पहिचान के बिना कवनो अनुमति के इस्तेमाल, व्यावसायिक फायदा या गलत प्रयोग पर तुरंत रोक लगा देले बा। ई आदेश न्यायमूर्ति ज्योति सिंह के अदालत से CS (COMM) 680/2026 – रविन्द्र शुक्ला उर्फ रवि किशन बनाम अशोक कुमार (जॉन डो) एवं अन्य मुकदमा में आइल बा।

याचिका में कहल गइल रहे कि तीन दशक से बेसी समय से भारतीय सिनेमा, टेलीविजन अउर सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रवि किशन आपन कड़ी मेहनत आ लोकप्रियता के दम पर समाज में एक खास पहिचान बनवले बाड़ें। आरोप लगावल गइल कि कइयन लोग अउर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स उनकी बिना कवनो अनुमति के उनकर नाम, फोटो आ आवाज़ के इस्तेमाल कर रहल बाड़े। सोशल मीडिया पर उनकर नाम से भ्रामक, मनगढ़ंत, अश्लील अउर आपत्तिजनक चीज प्रसारित कइल जा रहल बा, जबकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जनरेटिव एआई, मशीन लर्निंग अउर डीपफेक तकनीक के माध्यम से भी उनकी पहिचान के गलत इस्तेमाल हो रहल बा। याचिका में ई बात भी कहल गइल कि अइसन हरकतन से उनकर सार्वजनिक प्रतिष्ठा, व्यक्तिगत सम्मान अउर बरिसन से कमाइल गइल साख के लगातार अइसन नुकसान पहुँच रहल बा जेकर भरपाई सम्भव नइखे।

मामला के सुनवाई के दौरान न्यायालय पहिला तौर पर (Prima Facie) ई मनलस कि याचिकाकर्ता के पक्ष मजबूत बा, सुविधा के संतुलन उनकी ओर बा अउर जेकर भरपाई न हो सके अइसन नुकसान से बचे खातिर तुरंत सुरक्षा देवल जरूरी बा। एकरा बाद अदालत प्रतिवादियन के (चाहे उहे जानल-पहिचानल होखें या अनजान होखें) ई निर्देश दिहलस कि ऊ लोग रवि किशन के नाम, फोटो, आवाज़, सादृश्यता, व्यक्तित्व चाहे कवनो दोसर विशिष्ट पहिचान के कवनो रूप में व्यक्तिगत या व्यावसायिक फायदा खातिर इस्तेमाल ना करिहें। अदालत ई साफ कइले बा कि ई रोक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जनरेटिव एआई, मशीन लर्निंग, डीपफेक सहित सभे आधुनिक तकनीकन अउर भौतिक, आभासी (Virtual) चाहे सोशल मीडिया नियर हर माध्यम पर बराबर लागू होई।

अदालत आपन आदेश में ई निर्देश भी देले बा कि रवि किशन के पहिचान के इस्तेमाल कइके कवनो प्रकार के अश्लील, अभद्र चाहे आपत्तिजनक ऑडियो-वीडियो सामग्री के प्रकाशन या प्रसारण ना कइल जाई। एकरा साथे-साथे इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स (पहले ट्विटर), यूट्यूब अउर दोसर वेबसाइटन पर उपलब्ध आपत्तिजनक लिंकन के तय समय के भीतर हटावे के निर्देश देवल गइल बा। न्यायालय ई बात भी कहलस कि यदि संबंधित प्रतिवादी इन निर्देश के पालन नइखें करत, तऽ संबंधित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के भी कानून के मुताबिक जरूरी कार्रवाई करत हुए ऊ सामग्री हटावे के होई। अदालत व्यक्तित्व अधिकारन से जुड़ल पुरान महत्वपूर्ण फैसलन के हवाला देत भइल ई साफ़ कइलस कि कवनो सार्वजनिक हस्ती के पहिचान, प्रतिष्ठा आ प्रसिद्धि के बिना अनुमति के इस्तेमाल कइल भारतीय कानून के तहत सुरक्षित अधिकारन के उल्लंघन बा।

एह महत्वपूर्ण मुकदमा में वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन अउर संजय उपाध्याय के अगुवाई में वकीलन के टीम याचिकाकर्ता के पक्ष रखलस। एह में अधिवक्ता कृष्ण कुमार शुक्ला रवि किशन जी के तरफ से न्यायालय में बहस कइलें अउर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर व्यक्तित्व अधिकारन के उल्लंघन, एआई आधारित गलत इस्तेमाल अउर तुरंत अंतरिम सुरक्षा के जरूरत से जुड़ल महत्वपूर्ण कानूनी पहलुअन के न्यायालय के सोझा रखे में बड़ भूमिका निभवलें।

याचिकाकर्ता रवि किशन के तरफ से अधिवक्ता कृष्ण कुमार शुक्ला ए फैसला के स्वागत करत भइल कहलें:
“ई फैसला खाली कवनो एक अभिनेता या जनप्रतिनिधि के अधिकारन के रक्षा तक सीमित नइखे, बल्कि डिजिटल जुग में हर एक सार्वजनिक हस्ती के पहिचान, प्रतिष्ठा आ सम्मान के सुरक्षा के एक मजबूत संदेसा देता। अदालत साफ कर दिहले बा कि एआई अउर डीपफेक नियर तकनीकन के इस्तेमाल कवनो व्यक्ति के पहिचान के व्यावसायिक फायदा या दुरुपयोग खातिर नइखे कइल जा सकत। हमार मानल बा कि ई निर्णय भारत में व्यक्तित्व अधिकारन आ प्रचाराधिकारन के क्षेत्र में आगू के अदालती दिशा तय करे खातिर एक मील के पत्थर (Milestone) साबित होई।”

कानून के जानकारन के मानल बा कि ई आदेश भारत में व्यक्तित्व अधिकारन आ प्रचाराधिकारन के विकास के दिशा में एक ऐतिहासिक न्यायिक कदम बा। ई फैसला न सिर्फ एआई अउर डीपफेक के माध्यम से पहिचान के गलत इस्तेमाल पर कानूनी रोक लगवलस, बल्कि इंटरनेट माध्यम अउर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जवाबदेही भी तय कईलस। साथ ही ई साफ संदेसा भी दिहलस कि कवनो व्यक्ति के बरिसन के मेहनत से कमाइल पहिचान, प्रतिष्ठा आ सामाजिक छवि के बिना अनुमति के व्यावसायिक इस्तेमाल या ओकरा के बिगाड़े के कोसिस अब अदालतन के कड़ा कार्रवाई के दायरा में आई।
एह मामला के अगली सुनवाई 16 अक्टूबर, 2026 के तय कइल गइल बा।

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