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श्रीलंका में सरकार विरोधी विरोध प्रदर्शन पर उतरले बौद्ध भिक्षु, प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति राजापक्ष के आवास पर कब्जा कर लिहले

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श्रीलंका के प्रभावशाली बौद्ध भिक्षु राष्ट्रपति गोटाबाया राजापक्ष के इस्तीफा देबे खातिर जोर देबे खातिर एगो नया आंदोलन शुरू कइले बाड़न. शनिचर का दिने प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति राजापक्ष के आधिकारिक आवास पर कब्जा कर लिहले. हालांकि राष्ट्रपति गोटाबाया प्रदर्शनकारी के आवे से पहिले राजापक्ष आवास से निकल गईले। शनिचर का दिने राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास का नजदीक गैले फेस में एगो बड़हन जनप्रदर्शन के आयोजन कइल गइल. एह विरोध प्रदर्शन में भाग लेबे खातिर सोशल मीडिया पर जोरदार अभियान चलावल जात रहे आ देश भर के लोग से एह विरोध में चहुँपे के अपील कइल गइल.

सरकार रोके के कोशिश कईलस

एह प्रदर्शन के रोके खातिर राजापक्ष सरकार के ओर से न्यायपालिका के आवरण लेबे के कोशिश सफल नइखे भइल. पुलिस ए प्रदर्शन प रोक लगावे के निहोरा करत एगो अदालत में आवेदन देले रहे। बाकिर गुरुवार के अदालत ओह याचिका के ठुकरा दिहलसि. एहसे विरोध के राह खुल गइल बा. अब कोलंबो में शनिचर का दिने सामान्य जीवन में गड़बड़ी होखे के अनुमान लगावल गइल बा.

एही बीच बौद्ध भिक्षु लोग आपन अभियान शुरू क देले बा। गुरुवार के उ वट्टला नाम के जगह से 12 किलोमीटर पैदल चलत कोलंबो किला पहुंचले। राष्ट्रपति राजापक्ष पिछला अप्रैल से एहिजा रहत बाड़न. अप्रैल में एगो उग्र भीड़ राष्ट्रपति के निजी आवास के घेर लेले रहे। एकरा बाद राजापक्ष के परिवार कोलंबो किला में आ गईल। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार के भईल पैदल यात्रा में करीब 100 भिक्षु शामिल रहले। लेकिन कोर्ट के आदेश के चलते ए लोग के मार्च में रुकावट आईल।

तब ऊ भिक्षु लोग अनशन शुरू कर दिहल. बौद्ध भिक्षु उलापाने समंगला थेरो जुटल भिक्षु लोग के संबोधित करत कहले- ‘ईंधन संकट के बावजूद बौद्ध भिक्षु लोग इहाँ पहुंच गईल बाड़े। देश आ इतिहास के प्रति आपन कर्तव्य निभावे खातिर ई लोग एहिजा आइल बा लोग. एहसे कोर्ट के आदेश लेके इनका के रोके के कोशिश मत करीं।

बौद्ध भिक्षु लोग सबसे पहिले राजापक्ष के समर्थन कइल

बौद्ध भिक्षु लोग के आंदोलन के राष्ट्रपति राजापक्ष खातिर एगो बड़ झटका मानल जा रहल बा। नवंबर 2019 में भईल चुनाव में भिक्षु लोग उनुका के पुरजोर समर्थन कईले रहे। श्रीलंका में दू करोड़ के आबादी वाला बहुसंख्यक सिंहली समुदाय बौद्ध धर्म के पालन करे ला। एही से भिक्षु लोग के समर्थन के महत्वपूर्ण मानल जाला। कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षक लोग के राय बा कि देश में महंगाई आ जरूरी चीजन के कमी के चलते जनमत के एगो बड़हन हिस्सा भिक्षु लोग के खिलाफ हो गइल काहें से कि ई लोग राजापक्ष परिवार से नजदीकी रहे। एही से अब बौद्ध भिक्षु लोग सरकार विरोधी रुख अपनावे खातिर मजबूर हो गइल बा.

समंगला थेरो के दावा बा कि उनुका सरकार विरोधी अभियान के देश भर के बौद्ध भिक्षु समर्थन देत बाड़े. उ कहले- ‘ई त अभी शुरुआत बा।’ विरोध स्थल पर पहुंचे वाला भिक्षु के संख्या आवे वाला दिन में बढ़त रही।

देश में गहिराह होखत आर्थिक संकट के चलते श्रीलंका में तीन महीना पहिले ‘गोटा गो होम’ (गोटाबाया में वापस जा) आंदोलन शुरू भईल रहे। तब से ई लगातार जारी बा। बाकिर लमहर अंतराल का बाद अब शनिचर का दिने कोलंबो में एह आंदोलन के एगो बड़हन कार्यक्रम के आयोजन कइल गइल बा.

290170cookie-checkश्रीलंका में सरकार विरोधी विरोध प्रदर्शन पर उतरले बौद्ध भिक्षु, प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति राजापक्ष के आवास पर कब्जा कर लिहले

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