Medical College Rule : अब कवनो प्राइवेट कंपनी खोल सकी मेडिकल कॉलेज, NMC बदललस नियम

NMC New Rules: Private Companies Can Now Open Medical Colleges

Share

नई दिल्ली। देस में मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में बड़ बदलाव भइल बा। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) मेडिकल कॉलेज खोले के नियम में अहम संशोधन कइले बा। अब कंपनीज एक्ट 2013 के तहत रजिस्टर कवनो प्राइवेट कंपनी मेडिकल कॉलेज खोल सकेली। पहिले ई सुविधा खाली सेक्शन-8 (नॉन-प्रॉफिट) कंपनी तक सीमित रहे। एह फैसला के बाद मेडिकल शिक्षा में निजी निवेश बढ़े के संभावना जतावल जा रहल बा।

Medical College Rule में का बदलल?

पहिले मेडिकल कॉलेज खोले खातिर कंपनी के सेक्शन-8 के तहत नॉन-प्रॉफिट संस्था होखे के जरूरी रहे। एह तरे के कंपनी आपन बचल कमाई के मुनाफा के रूप में ना बांट सकेली सs। ई राशि खाली शिक्षा, चैरिटी आ संस्थान के विकास में इस्तेमाल हो सकेला। अब NMC नया नियम लागू कइले बा, जवना के तहत कंपनीज एक्ट 2013 के अंतर्गत रजिस्टर कवनो कंपनी मेडिकल कॉलेज स्थापित कs सकेली सs।

2019 में नियम भइल रहे सख्त

साल 2017 में तत्कालीन मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) कंपनीज एक्ट 1956 के तहत रजिस्टर कंपनियन के मेडिकल कॉलेज खोले के अनुमति देले रहे। ट्रस्ट आ सोसाइटी के कंपनी में बदले के रास्ता खुलल रहे। बाकिर 2019 में MCI के जगह नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) बनला के बाद नियम सख्त कs दिहल गइल आ खाली सेक्शन-8 कंपनी के अनुमति मिलत रहे। अब फेर नियम बदल के मेडिकल कॉलेज खोले के दायरा बढ़ा दिहल गइल बा।

सरकार एह बदलाव के काहे जरूरी बतावत बिया?

सरकार के माने के बा कि नॉन-प्रॉफिट वाला शर्त के चलते कइयन गो बड़ निजी कंपनी मेडिकल शिक्षा में निवेश करे से बचत रहली सs। जबकि कइयन जगह अप्रत्यक्ष रूप से मुनाफा कमावल जात रहे। सरकार के तर्क बा कि अगर कानूनी रूप से निजी कंपनियन के अनुमति मिली तs निवेश बढ़ी, मेडिकल कॉलेज के संख्या बढ़ी आ सरकार के टैक्स के रूप में राजस्व मिली।

वेदांता मेडिकल कॉलेज रहे पहिला उदाहरण

मई 2017 में वेदांता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, पालघर देस के पहिला प्राइवेट लिमिटेड मेडिकल कॉलेज बनल रहे। सुरुआत में कॉलेज प्रबंधन फीस तय करे के आजादी मंगलस, बाकिर बाद में सरकारी नियम माने के पड़ल। साल 2025 में एह कॉलेज के मैनेजमेंट कोटा के फीस 15.7 लाख रुपिया रहे, जवन राज्य के सबसे महंगा मेडिकल कॉलेज फीस में गिनल गइल।

फीस बढ़े के आशंका पs बहस तेज

देस के कइयन गो डीम्ड यूनिवर्सिटी मेडिकल कॉलेज ट्रस्ट आ सोसाइटी चलावेली सs। नियम के हिसाब से ई नॉन-प्रॉफिट होखे के चाहीं, बाकिर एकर फीस पs खास नियंत्रण नइखे। नया नियम लागू होखे के बाद विशेषज्ञन के माने के बा कि मेडिकल कॉलेज के संख्या जरूर बढ़ी, बाकिर फीस बढ़े के आशंका आ मेडिकल शिक्षा के महंगाई पs बहस तेज हो सकेला।

सुप्रीम कोर्ट के पुरान फैसला

सुप्रीम कोर्ट 1993 आ 2002 के फैसला में साफ कहले रहे कि शिक्षा चैरिटी के काम हs, एमे मुनाफाखोरी के अनुमति ना होखे के चाहीं। संस्थान खाली विकास खातिर उचित बचत रख सकेला। अब NMC के नया नियम के बाद निजी निवेश के रास्ता आसान हो गइल बा। हालांकि, मेडिकल शिक्षा के गुणवत्ता आ फीस नियंत्रण के सवाल आगहूं चरचा के विषय बनल रही।

Read Also: CJP Protest : अभिजीत दीपके भूख हड़ताल पर बइठे के कइलें एलान, दिल्ली पुलिस पs मारपीट के लगवलें आरोप

Share this article

Facebook
Twitter X
WhatsApp
Telegram
 
- Sponsored Ads-