नई दिल्ली। चारा घोटाला ममिला में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव के सुप्रीम कोर्ट से बड़ राहत मिलल बा। सुप्रीम कोर्ट झारखंड हाई कोर्ट द्वारा लालू यादव के दिहल गइल जमानत के फैसला में दखल देवे से इनकार कs देलस आ सीबीआई के दायर याचिका खारिज कs देलस।
एह ममिला के सुनवाई जस्टिस एमएम सुंदरेश आ जस्टिस पीबी वराले के बेंच के सामने भइल। कोर्ट साफ कहलस कि हाई कोर्ट के आदेस में दखल देवे के जरूरत नइखे। हालांकि, अदालत झारखंड हाई कोर्ट से कहले बा कि लंबित अपील पs जल्दी सुनवाई कs के छव महीना के भीतर फैसला करे के कोसिस कइल जावs।
बेंच कहलस- आदेस में दखल देवे के जरूरत नइखे
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट कहलस कि हाई कोर्ट के आदेस में हस्तक्षेप करे के कवनो आधार नइखे। बेंच कहलस कि अपील साल 2018 से लंबित बा, एकरा से अब हाई कोर्ट एह ममिला पs तेजी से सुनवाई करे। अदालत इहो साफ कइलस कि कानूनी सवाल फिलहाल खुला राखल गइल बा।
CBI कहलस- सजा के गणना में भइल गलती
CBI के ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू पेश भइलें। ऊ दलील देलें कि हाई कोर्ट लालू यादव के काटल सजा के अवधि के गणना करे में गलती कइले बा।
उनकर कहनाम रहे कि हाई कोर्ट ई मान के जमानत दे देलस कि लालू यादव आधा सजा पूरा कs चुकल बाड़ें, जबकि अलग-अलग सजा के गणना सही तरीका से ना कइल गइल। CBI के दावा रहे कि एह आधार पs जमानत ना मिले के चाही।
कपिल सिब्बल कहलें- ई जज के विवेकाधिकार बा
लालू यादव के ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल पेश भइलें। ऊ कहलें कि जमानत देवे के फैसला अदालत के विवेकाधिकार के हिस्सा होला। उनका मोताबिक हाई कोर्ट कानून के तहत फैसला सुनवले बा।
गौर करे वाला बात बा कि चारा घोटाला ममिला में लालू यादव जेल के आधा सजा पूरा कs लेले रहलें। एह आधार पs झारखंड हाई कोर्ट 2019 में उनकर जमानत मंजूर कइले रहे। बाद में हाई कोर्ट के एह फैसला के चुनौती देत CBI सुप्रीम कोर्ट पहुंचल रहे, बाकिर अब सर्वोच्च अदालत CBI के याचिका खारिज करत लालू यादव के राहत बरकरार रखले बा।








