गोरखपुर। भोजपुरी आ हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार आ पेशा से कॉलेज प्राध्यापक रहल डाॅ. फूलचंद प्रसाद गुप्त के किताब “भाेजपुरी कs अमर साधक” के लोकार्पण अतवार के राजकीय बौद्ध संग्रहालय, तारामंडल में कइल गइल। एह दौरान कार्यक्रम अध्यक्ष डाॅ. वेदप्रकाश पांडेय, डॉ. सदानंद प्रसाद गुप्त, डॉ. प्रदीप कुमार राव, प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा आ डाॅ. यशवंत सिंह राठौर मंचासीन रहल लो। कार्यक्रम में बड़ संख्या में साहित्यकार, शिक्षाविद आ भोजपुरी प्रेमी भाग लिहल।
एह दौरान आपन बात रखत राजकीय बौद्ध संग्रहालय के उपनिदेशक डॉ. यशवंत सिंह राठौर कहलें कि ई पहिला बेर बा जब इहां सांस्कृतकि आयोजन से हटके पुस्तक विमाेचन के आयोजन हो रहल बा। ऊ किताब के बारे में बतवलें कि एमे बटोहिया गीत बा जवना के पढ़ के हम जान पवनी कि भोजपुरी में एह तरे के देसभक्ति गीत के रचा भइल बा।
प्रो. हर्ष सिन्हा अपना वक्तव्य में एह बात पs बल देलें कि जवना तरे डिजिटलाइजेशन के दौर बढ़ रहल बा, ओमे जरूरत बा कि भोजपुरी के ऐतिहासिक आ प्रामाणिक चीजन के डिजिटल मंचन पर ले आवल जावs। ऊ कहलें कि डाॅ. फूलचंद गुप्त के अइसन किताब एह डिजिटलाइजेशन में भोजपुरी के सबसे बड़ आधार बनी।
बाकि मंचासीन अतिथि लोग आपन-आपन बात रखत किताब के निर्माण से जुड़ल रोचक किस्सास सुनावत एह बात के जिकिर कइल कि डॉ. गुप्त के ई पुस्तक भोजपुरी भाषा आ ओकर ओह साधकन के समर्पित बा जे एह भाषा के जिन्दा रखे में अहम भूमिका निभवलस।
कार्यक्रम के दौरान मंच सचालन खुद डाॅ. फूलचंद गुप्त कइलें। एह दौरान भोजपुरी के जानल-मानल साहित्यकार, कवि आ भोजपुरी प्रेमियन के जुटान भइल।
भोजपुरी के 12 अमर साधकन से परिचय कराई ई किताब
बता दी कि डिस्काउंट ग्रुप ऑफ पब्लिकेशन्स के ओर से प्रकाशित डाॅ. फूलचंद गुप्त के किताब “भाेजपुरी कs अमर साधक” 12 गो अइसन भोजपुरी विभूतियन से परिचय कराई जे भोजपुरी के 1960 से 1990 के कालखंड में अलग ऊंचाई में ले गइल। एमे गीतकार शैलेंद्र, गायक मो. खलील, लक्ष्मण शाहाबादी, रघुवीर नारायण, मोती बीए, महेंद्र मिसिर, भिखारी ठाकुर से लेके रविंद्र श्रीवास्तव जुगानी “भाई” बारे में विस्तार से जाने के मिली। ई डाॅ. फूलचंद गुप्त के 26वां किताब हs जवन अभी तक प्रकाशित हो चुकल बा। एमे कुल 16गो किताब भोजपुरी के बा।






