नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र सुरू होखे से पहिले कांग्रेस आपन रणनीति साफ कs देले बिया। पार्टी ऐलान कइलस कि जदि परिसीमन बिल (Delimitation Bill) संसद में पेश होत बा, तs कांग्रेस ओकर पुरजोर विरोध करी। एह फैसला पs दिल्ली में सोनिया गांधी के नेतृत्व में भइल कांग्रेस संसदीय दल के बैठक में सहमति बनल।
संसद के मानसून सत्र आवे वाला सोमार से सुरू होखे जा रहल बा। जानकारी के मोताबिक एह सत्र में सरकार कइयन गाे अहम संविधान संशोधन विधेयक पेश कs सकेले। एह बीच कांग्रेस संसदीय दल के बैठक 10 जनपथ पs आयोजित भइल, जवना में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कइयन गाे वरिष्ठ नेता सामिल रहे लोग।
बैठक के बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश कहलें कि पार्टी परिसीमन बिल के विरोध करी आ एह मुद्दा पs समान विचारधारा वाला विपक्षी दलन के संगे एकजुट होके सरकार के घेरल जाई।
जयराम रमेश : विपक्ष मिलके करी विरोध
जयराम रमेश कहलें कि सरकार परिसीमन बिल ले आवे के तइयारी में बिया। हालांकि अभी तक सरकार आधिकारिक रूप से बिल के जानकारी नइखे देले, बाकिर कांग्रेस पहिले से तइयारी सुरू कs देले बिया। ऊ कहलें कि सर्वदलीय बैठक मात्र औपचारिकता बन के रह गइल बा। असली फैसला सरकार पहिले से तय कs लेत बिया, एही से विपक्ष अब संसद में मजबूती से आपन पक्ष रखी।
‘एक देश, एक चुनाव’ सहित कइयन गो बिल के विरोध
कांग्रेस के बैठक में खाली परिसीमन बिले ना, बलुक ‘एक देश, एक चुनाव’, FCRA संशोधन बिल आ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून 2013 में प्रस्तावित बदलाव पs चरचा भइल। पार्टी साफ संकेत देले बिया कि सरकार के ओर से आवे वाला अधिकतर विवादित बिलन के संसद में विरोध कइल जाई।
एह महत्वपूर्ण बैठक में सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, केसी वेणुगोपाल, शशि थरूर, पी चिदंबरम, कुमारी शैलजा आ मनीष तिवारी सहित कांग्रेस के कइयन गो सांसद मवजूद रहल लो। सब नेता मानसून सत्र में सरकार के घेरे खातिर रणनीति पs विस्तार से चरचा कइल।
सरकार जुटावत बिया जरूरी संख्या
राजनीतिक सूत्रन के मोताबिक, संविधान संशोधन बिल पास करावे खातिर सरकार के 360 सांसदन के समर्थन जरूरी होई। दावा बा कि सरकार अभी तक करीब 324 सांसद के समर्थन जुटा चुकल बिया। कुछ क्षेत्रीय दलन के समर्थन मिलला पs ई संख्या आउर बढ़ सकेला।
एह वजह से परिसीमन बिल संसद के मानसून सत्र के सबसे चर्चित मुद्दा बन सकेला। अब देखे के रही कि सरकार एह बिल के पेश करेले कि ना आ विपक्ष के रणनीति केतना असरदार साबित होला।









