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Artificial Cornea : बिना डोनर के लवट सकेला आंख के रोशनी! आर्टिफिशियल कॉर्निया बन रहल बा नया उम्मीद

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नई दिल्ली। कॉर्निया खराब हो गइला से आंख के रोशनी चले जाये आ समय पs डोनर कॉर्निया ना मिले, तs मरीज के इलाज के विकल्प बहुते सीमित हो जाला। अइसन इस्थिति के मेडिकल भाषा में कॉर्नियल ब्लाइंडनेस कहल जाला। अब अइसन मरीज खातिर आर्टिफिशियल कॉर्निया माने केराटोप्रोस्थेसिस एगो नया उम्मीद बन के सामने आ रहल बा।

आर्टिफिशियल कॉर्निया डोनर टिश्यू पs निर्भर ना होला। खास सामग्री से बनल एह उपकरण के मदद से खराब कॉर्निया के जगह रोशनी के आंख के भीतर पहुंचावे खातिर एगो नया रास्ता तइयार कइल जा सकेला।

एम्स में आर्टिफिशियल कॉर्निया से मिल रहल उम्मीद

दिल्ली के एम्स इस्थित आरपी सेंटर में आर्टिफिशियल कॉर्निया के इस्तेमाल से गंभीर कॉर्नियल बेमारी से पीड़ित मरीजन के इलाज कइल जा रहल बा। सेंटर के प्रो. डॉ. राजेश सिन्हा के मोताबिक, अब तक करीब 20 मरीजन में आर्टिफिशियल कॉर्निया लगावल जा चुकल बा आ सुरुआती नतीजा उत्साहजनक रहल बा।

हालांकि, विशेषज्ञन के मोताबिक ई इलाज हर मरीज खातिर उपयुक्त नइखे। मरीज के आंख के इस्थिति आ रेटिना आउर ऑप्टिक नर्व के हालत के आधार पs डॉक्टर फैसला करत बा लो।

देस में डोनर कॉर्निया के कमी चुनौती

भारत में हर साल करीब एक लाख मरीजन के कॉर्निया ट्रांसप्लांट के जरूरत पड़ेला। बाकिर जरूरत के मुकाबला डोनर कॉर्निया के उपलब्धता कम बा।

आंकड़न के मोताबिक, 2022-23 में 62,370, 2023-24 में 66,434 आ 2024-25 में 69,848 डोनर कॉर्निया एकत्र कइल गइल। माने जरूरत के मुकाबला हर साल बड़ संख्या में मरीज डोनर कॉर्निया के इंतजार में रह जालें।

वर्तमान में देस में 396 नेत्र बैंक एह दिशा में काम करत बा। डोनर कॉर्निया के कमी के कारण गंभीर कॉर्नियल बेमारी वाला मरीजन खातिर आर्टिफिशियल कॉर्निया एगो महत्वपूर्ण विकल्प बन सकेला।

का होला आर्टिफिशियल कॉर्निया?

आर्टिफिशियल कॉर्निया के तकनीकी नाम केराटोप्रोस्थेसिस (Keratoprosthesis) हs। ई डोनर टिश्यू ना होके विशेष सामग्री से बनल एगो कृत्रिम उपकरण होला।

एमे एगो पारदर्शी ऑप्टिकल हिस्सा होला, जवन खराब कॉर्निया के चलते बंद भइल रोशनी के रास्ता के दोबारा खोल देला। एकरा से रोशनी आंख के अंदर पहुंच सकेला आ रेटिना तक जा सकेला।

आर्टिफिशियल कॉर्निया से कइसे वापस आवेला रोशनी?

जब आर्टिफिशियल कॉर्निया के पारदर्शी हिस्सा आंख में लगावल जाला, तs प्रकाश ओकरा के माध्यम से आंख के अंदर पहुंचेला। प्रकाश रेटिना तक पहुंचला के बाद ऑप्टिक नर्व के माध्यम से दृश्य संकेत मस्तिष्क तक पहुंचावेला।

सरल भाषा में कहल जावs त आर्टिफिशियल कॉर्निया रेटिना भा ऑप्टिक नर्व के ठीक ना करेला, बलुक खराब कॉर्निया के जगह रोशनी खातिर एगो नया रास्ता उपलब्ध करावेला।

कवना मरीजन के हो सकेला फायदा?

आर्टिफिशियल कॉर्निया हर कॉर्नियल ब्लाइंडनेस वाला मरीजन खातिर सही विकल्प नइखे। खासकर अइसन मरीजन में एकर इस्तेमाल पs विचार कइल जा सकेला, जेकरा में सामान्य कॉर्निया ट्रांसप्लांट संभव ना होखे भा ट्रांसप्लांट के सफल होखे के संभावना कम होखे।

इलाज के बाद मरीज के दृष्टि में सुधार हो सकेला। हालांकि, हर मरीज के बिल्कुल सामान्य आंख जइसन दृष्टि मिली, ई जरूरी नइखे। दृष्टि के नतीजा रेटिना, ऑप्टिक नर्व आ आंख के आउर संरचना के इस्थिति पs निर्भर करेला।

गंभीर कॉर्नियल बsमारी के कारण लगभग कुछुओ ना देख पावे वाला मरीज खातिर उपयोगी दृष्टि के वापसियो बड़ फायदा मानल जा सकेला।

आर्टिफिशियल कॉर्निया के लागत कतना बा?

भारत में केराटोप्रोस्थेसिस के सामान्य लागत करीब 2 लाख से 4 लाख रुपिया बतावल जाला। हालांकि, वास्तविक खर्च उपकरण, अस्पताल, सर्जरी आ मरीज के स्वास्थ्य इस्थिति के आधार पs अलग-अलग हो सकेला।

जरूरी बात

आर्टिफिशियल कॉर्निया डोनर कॉर्निया के कमी के इस्थिति में एगो संभावित विकल्प हs, बाकिर ई हर मरीज खातिर उपयुक्त इलाज नइखे। कॉर्निया से जुड़ल गंभीर बेमारी भा दृष्टि संबंधी समस्या में विशेषज्ञ नेत्र चिकित्सक से जांच आ सलाह जरूरी बा।

साभार : दैनिक जागरण

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