ज्ञानवापी मामला में आजु ना आई फैसला, एह सात याचिका में से कवन याचिका प पहिले होई सुनवाई

By Anurag Ranjan

Published on: May 24, 2022

ज्ञानवापी मामला में वाराणसी जिला जज के अदालत मंगलवार के आपन फैसला सुनवलस कि सुप्रीम कोर्ट से ओकरा के हस्तांतरित याचिका के सबसे पहिले के सुनवाई करी। हिन्दू आ मुस्लिम दलन के दलील सुनला का

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ज्ञानवापी मामला में वाराणसी जिला जज के अदालत मंगलवार के आपन फैसला सुनवलस कि सुप्रीम कोर्ट से ओकरा के हस्तांतरित याचिका के सबसे पहिले के सुनवाई करी। हिन्दू आ मुस्लिम दलन के दलील सुनला का बाद सोमार का दिने जिला जज एके विश्वेश आपन फैसला सुरक्षित राख लिहलन. सुनवाई के दौरान हिन्दू पक्ष के तर्क रहे कि चूंकि अदालत के ओर से नियुक्त आयोग सर्वेक्षण के काम पूरा क लेले बा, एहसे प्रतिवादी पक्ष के आपन आपत्ति पेश करे के चाही। दोसरा तरफ अंजुमान इनाजतिया मसाजिद के वकील मो. ए मामला में सोमवार के सुनवाई के बाद हिन्दू पक्ष के वकील मदन मोहन यादव कहले कि, दुनो पक्ष के सुनवाई के बाद अदालत मंगलवार के पहिला सुनवाई के याचिका के बारे में आदेश देवे के कहले बिया।

एकरा संगे-संगे ज्ञानवापी मस्जिद में मिले के दावा कईल गईल शिवलिंग के पूजा करे के अनुमति मांगत अदालत में एगो नाया याचिका दाखिल कईल गईल बा। सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार के अपना आदेश में ज्ञानवापी मामला के वाराणसी सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के अदालत से जिला जज के अदालत में स्थानांतरित करे के आदेश देले रहे। शीर्ष अदालत कहले रहे कि मामला के जटिलता के देखत सुनवाई एगो वरिष्ठ अउरी अनुभवी न्यायाधीश के ओर से करावे के चाही।

सोमवार के जसही कार्यवाही शुरू भईल, अंजुमन इंतेजमिया कहले कि पहिले सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन करत इ तय होखे के चाही कि राखी सिंह बनाम यूपी राज्य के मामला कायम बा कि ना। कहलन कि मुकदमा दाखिल कइला का बाद रखरखाव के क्षमता के चुनौती दिहल गइल बाकिर निचला अदालत एकरा के अनदेखी करत सर्वेक्षण आयोग के आदेश दिहलस. अब पहिला फैसला लेबे के पड़ी कि विशेष पूजा स्थल अधिनियम 1991 लागू बा कि ना.

दूसरा ओर वादी के पक्ष में अधिवक्ता विष्णु जैन कहले कि आयोग के कार्यवाही के वीडियो, फोटो ए मामला से जुड़ल सबूत बा। पहिले उनुका वीडियो अवुरी फोटो के कॉपी देवे के चाही, ओकरा बाद दुनो ओर से आपत्ति के बाद इ तय होखे के चाही कि सूट मेंटेन करे लायक बा कि ना। उ कहले कि इहाँ विशेष पूजा स्थल अधिनियम लागू नईखे।

उ वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन के बेमारी के हवाला देत एक सप्ताह के समय भी मंगले। डीजीसी सिविल महेंद्र प्रसाद पांडेय इहो बतवले कि प्रतिवादी विशेष पूजा स्थल अधिनियम के लेके दाखिल आवेदन के कॉपी नईखन देले, तबहूँ 1991 से पहिले अवुरी बाद में पूजा कईल जाता। अइसे त ई कानून लागू ना होखी.

इहाँ सात गो याचिका दिहल गइल बा

इहे मांग बा हिन्दू पक्ष के

1. श्रृंगार गौरी के नित्य पूजा के मांग
2. वजुखाना में मिलल कथित शिवलिंग के पूजा के मांग
3. नंदी के उत्तर में दीवार तोड़ के मलबा हटावे के मांग
4. शिवलिंग के लंबाई, चौड़ाई जाने खातिर सर्वेक्षण के मांग
5. वजुखाना खातिर वैकल्पिक व्यवस्था करे के मांग

इ मांग मुस्लिम पक्ष के बा
1. वजुखाना के सील करे के विरोध
2. ज्ञानवापी सर्वेक्षण अउरी 1991 अधिनियम के तहत केस पर सवाल

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