लाइफस्टाइल डेस्क। पैकेटबंद खाना पs फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल के बहस तेज हो गइल बा। बाजार में ‘नेचुरल’, ‘मल्टीग्रेन’ आ ‘हाई फाइबर’ जइसन दावा देख के लोग अक्सर सामान किन लेत बा, बाकिर असली जानकारी पैकेट के पीछे लिखल सामग्री आ पोषण तालिका में छिपल रहेला।
विशेषज्ञन के सलाह बा कि माता-पिता लइकन के टिफिन में पैकेटबंद स्नैक्स के जगह ताजा फल, भुजल चना, मखाना, पोहा, मुरमुरा, शकरकंद आ बाजरा-ज्वार जइसन विकल्प सामिल करे लोग। पैकेट किनत घरी चीनी आ नमक के मात्रा जरूर जांचीं।
चीनी खाली ‘शुगर’ नाम से ना, बलुक ग्लूकोज सिरप, फ्रक्टोज, डेक्सट्रोज आ माल्टोडेक्सट्रिन जइसन नाम से लिखल हो सकेला। एह चलते पैकेट के सामने के दावा के बजाय पीछे के लेबल पढ़ल जरूरी बा।
हाल के न्यायिक टिप्पणियन के बाद पैकेज्ड फूड पs चेतावनी लेबल के जरूरत पs चरचा आउर तेज भइल बा। मकसद उपभोक्ता के जागरूक बनावल आ कंपनियन से खाद्य सामग्री के बारे में साफ जानकारी उपलब्ध करावल बा।
लइकन के स्वाद के आदत धीरे-धीरे बदलल जा सकेला। घर के ताजा खाना, फल, सब्जी आ पारंपरिक भारतीय स्नैक्स के नियमित विकल्प बनावल बेहतर हो सकेला। सबसे जरूरी बा कि खाना किनत घरी खाली विज्ञापने ना, बलुक सामग्री, चीनी, नमक आ पोषण तालिका जरूर देखल जावs।









