नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के मोताबिक आज माने 31 अगस्त के बहुला चौथ (Bahula Chauth 2026) के परब मनावल जा रहल बा। ई परब हर साल भाद्रपद महीना के कृष्ण पक्ष के चतुर्थी तिथि के मनावल जाला। एह दिन गौ माता आ भगवान गणेश के पूजा-पाठ करे के खास महत्व बतावल गइल बा।
बहुला चौथ के व्रत महिला लोग संतान के लमहर उमिर, बढ़िया स्वास्थ्य आ परिवार में सुख-शांति के कामना से रखेला। रात में चंद्रमा के दर्शन कs के ओकरा के अर्घ्य देला के बादे व्रत के पारण कइल जाला। आईं जानल जावs कि बहुला चौथ के व्रत कब आ कइसे खोलल जाई।
बहुला चौथ 2026 के तारीख आ सुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद महीना के कृष्ण पक्ष के चतुर्थी तिथि के सुरुआत 30 अगस्त के रात 11 बजके 20 मिनट से होई। एह तिथि के समापन 31 अगस्त के रात 10 बजके 11 मिनट पs होई। उदया तिथि के आधार पs 31 अगस्त के बहुला चौथ के व्रत रखल जा रहल बा।
कब करीं बहुला चौथ व्रत के पारण?
बहुला चौथ के व्रत चंद्रमा के दर्शन आ अर्घ्य देला के बाद खोलल जाला। आज चंद्रोदय के समय रात 8 बजके 29 मिनट बतावल गइल बा। एह समय चंद्र देव के दूध, अक्षत, दूर्वा आ फूल से अर्घ्य देके व्रत के पारण कइल जा सकेला।
बहुला चौथ व्रत पारण के विधि
- सांझ के स्नान कs के देसी घी के दीया जराईं।
- भगवान गणेश आ माटी से बनल बहुला माता के विधि-विधान से पूजा करीं।
- पूजा के दौरान आरती करीं आ श्रद्धा से मंत्र के जाप करीं।
- चना के दाल, गुड़ आ मोदक भा लड्डू के भोग लगाईं।
- संतान के लमहर उमिर आ परिवार के सुख-शांति खातिर भगवान से प्रार्थना करीं।
- एगो लोटा में दूध, अक्षत, दूर्वा आ फूल मिला के चंद्र देव के अर्घ्य दीं।
- पूजा के बाद मंदिर में भा जरूरतमंद लोग के अन्न, धन आदि के दान करीं।
- चंद्रमा के अर्घ्य देला के बाद सात्विक भोजन से व्रत खोलीं।
पारण में का खा सकत बानी?
व्रत के पारण के समय कुट्टू, सिंघाड़ा के आटा, साबूदाना, मखाना आ फल आदि खाइल जा सकेला। ध्यान रहे कि पारण के भोजन सात्विक होखे आ एमे लहसुन-प्याज के इस्तेमाल ना कइल जावs।
भगवान गणेश के मिलेला विशेष किरपा
धार्मिक मान्यता के मोताबिक बहुला चउथ के व्रत रखला से जिनगी के बाधा आ संकट दूर होखेला। परिवार में सुख-शांति बनल रहेला आ भगवान गणेश के विशेष किरपा मिलेला। संतान के लमहर उमिर आ परिवार के खुसहाली खातिर ई व्रत खास महत्व रखेला।






