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सुप्रीम कोर्ट: हिजाब प्रतिबंध मामिला में दूनो जज के राय अलग-अलग, चीफ जस्टिस लगे भेजल गइल केस, बड़हन पीठ करी सुनवाई

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शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध के बरकरार रखे वाले कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश के चुनौती देवे वाली विभिन्न याचिका पर सुप्रीम कोर्ट बियफ़े के फैसला सुनवलें। एह मामिला में दूनों ही जज के राय अलग-अलग रहल। जहां जस्टिस हेमंत गुप्ता एह मामिला में कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसला के सही मानत बैन के खिलाफ अपील के खारिज कS दिहलस। उहवें दूसरा जज सुधांशु धूलिया के पीठ उनसे उलट राय जाहिर कइले बा। चूंकि एह मामला में जज लोग के एकराय नाइ बन पावल, एहलिए केस के आगे चीफ जस्टिस के पास भेजल गइल बा। एह मामले के सुनवाई अब बड़हन बेंच करी।

अपने फैसलन पर का बोललें जज?

जस्टिस हेमंत गुप्ता कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसला के खिलाफ दायर 26 अपील के खारिज कs दिहलें। हालांकि, ऊ सवाल उठावत कहलें कि का कॉलेज मैनेजमेंट छात्र के यूनिफॉर्म पर या हिजाब पहिनले के ले के केहू फैसला कs सकsता? का सरकारी आदेश शिक्षा तक पहुंच के उद्देश्य के पूरा करsता? हमरेहिसाब से जवाब अपीलकर्ता के खिलाफ हवें।

पीठ के दूसरे सदस्य सुधांशु धूलिया के राय अलग रहल। ऊ कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसला के दरकिनार करत कहलें कि विवाद खातिर आवश्यक धार्मिक अभ्यास के पूरा अवधारणा के आवश्यक नाइ रहल। उ कहलें कि हाईकोर्ट गलत रास्ता अपनवलस। जस्टिस धूलिया कहलें ‘ई दरअसल पसंद अउर अनुच्छेद- 14 अउर 19 के मामला ह। ई पसंद के मामला ह, न ज्यादा अउर न ही कम।’ जस्टिस धूलिया कहलें कि उनके मन में सबसे बड़ सवाल बालिका के शिक्षा के लेके रहल।
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