सेंट्रल डेस्क। बसपा सुप्रीमो मायावती के ओर से राजनीति से संन्यास लेवे के बात कहला के बाद पूर्व राज्यसभा सदस्य अशोक सिद्धार्थ उनका के चिट्ठी लिख के आपन जवाब देले बाड़ें। चिट्ठी में सिद्धार्थ मायावती के प्रति आपन निष्ठा जतावत कहलें कि उनका खातिर बहनजी के आदेस दुनिया के कवनो चीज से बढ़ के बा। ऊ कहलें कि पिछिला 35 साल से ऊ बसपा, कांशीराम आ डॉ. भीमराव आंबेडकर के मिशन खातिर समर्पित होके काम करत आइल बाड़ें।
अशोक सिद्धार्थ चिट्ठी में मायावती के आपन राजनीतिक गुरु आ बड़की बहिन बतावत कहलें कि बहनजी उनका के विधान परिषद आ राज्यसभा तक पहुंचवली। परिवार के सदस्य जइसन सम्मान देली। ई अइसन कर्ज बा, जेकरा के ऊ एह जिनगी में कबो नइखन चुका सकत।
पार्टी हित के खिलाफ कबो काम ना कइनी
सिद्धार्थ कहलें कि ऊ कबो पार्टी के हित के खिलाफ कवनो काम नइखन कइलें। मायावती के खिलाफ कुछ करे के बात तs सपनो में नइखन सोच सकत। ऊ तथागत गौतम बुद्ध आ कांशीराम के साक्षी मानत आपन निष्ठा के जिकिर कइलें। कहलें कि मायावती के एक-एक सलाह आ आदेस उनका खातिर अंतिम बात हs।
आकाश आनंद के सलाह देवे के आरोप के बतवलें गलत
अशोक सिद्धार्थ चिट्ठी में आकाश आनंद के सलाह देवे भा उनका के गुमराह करे के आरोप के खारिज कइलें। ऊ कहलें कि पिछिला कुछ महीना में आकाश आनंद से उनकर मुलाकात खाली कुछ मवकन पs भइल, जब उनकर कार्यक्रम ओह राज्यन में रहे, जेकर जिम्मेदारी मायावती उनका के देले रहली।
ऊ कहलें कि पार्टी के कुछ साथी उनका के मायावती से मिलल सम्मान के चलते ई आरोप लगावल कि ऊ पार्टी पs कब्जा करे के चाहत बाड़ें भा आकाश आनंद के गुमराह करे के कोसिस करत बाड़ें। सिद्धार्थ के मोताबिक ई सब आरोप पूरा तरे से निराधार बा। ई राजनीतिक विरोधियन के साजिश हs।
आकाश आनंद के वापस जिम्मेदारी देवे के फैसला राउर
सिद्धार्थ मायावती से अनुरोध कइलें कि उनका संन्यास लेवे के फैसला के आकाश आनंद के वापसी से जोड़ के ना देखल जावs। ऊ कहलें कि आकाश आनंद उनकर दामाद से पहिले मायावती के भतीजा आ आनंद कुमार के बेटा हवें। आकाश अपना जिनगी के दू दशक मायावती के छत्रछाया आ देखरेख में बितवले बाड़ें।
सिद्धार्थ कहलें कि उनका जइसन मामूली कार्यकर्ता खातिर आकाश आनंद के गुमराह कइल संभव नइखे। आकाश आनंद के वापस जिम्मेदारी देवे भा ना देवे के फैसला मायावती के हs।
‘मिशन के नुकसान हो रहल बा तs अभी संन्यास लेतानी’
चिट्ठी में अशोक सिद्धार्थ मायावती के त्याग आ समर्पण के तारीफ करत कहलें कि जदि उनका के लागत बा कि उनकर राजनीतिक आ सामाजिक जिनगी में बनल रहला से बहुजन मिशन के नुकसान हो रहल बा, तs ऊ तुरंत राजनीति आ सामाजिक जिनगी से संन्यास लेवे खातिर तैयार बाड़ें।
ऊ कहलें कि उनकर पूरा जिनगी मायावती के ऋणी बा आ उनका खातिर संन्यास ले लिहल बहुत छोट बात बा। चिट्ठी के आखिर में ऊ ‘जय भीम, जय भारत आ जय बहुजन समाज’ लिखत खुद के मायावती के कार्यकर्ता बतवलें। संगही, चिट्ठी लिखे में भइल देरी खातिर माफियो मंगलें।
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