नई दिल्ली। नेपाल में आइल तबाही के एक हफ्ता बीत गइल बा, बाकिर मलबा के बीच अभियो लोग अपना परिवार के सदस्यन के खोज में लागल बा। युद्ध स्तर पs रेस्क्यू ऑपरेशन चलावल जा रहल बा, बाकिर ई तबाही एतना भयावह बा कि एकरा से उबरे में कइयन साल लाग सकेला।
ग्लेशियर झील टूटे के चलते आइल एह आपदा में एक हजार से जादे लोग के मौत हो चुकल बा, जबकि चार हजार से जादे लोग लापता बतावल जा रहल बा। एह बीच IIT मंडी के एगो स्टडी में चउकावे वाला जानकारी सामने आइल बा।
करीब 200 ग्लेशियर झील के अध्ययन में पता चलल कि 9 से 12 ग्लेशियर झील खतरनाक इस्थिति में बाड़ी सs। एह झीलन के क्रिटिकल माने गंभीर खतरा वाला श्रेणी में रखल जा सकेला। ग्लेशियर पिघले के चलते एकर आकार लगातार बढ़ रहल बा। जदि ई झील कबो टूट गइल तs बड़ पैमाना पs तबाही मच सकेला।
10 साल में 30 से 60 फीसदी बढ़ल झीलन के दायरा
IIT मंडी के स्कूल ऑफ सिविल एंड एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग के एसोसिएट प्रोफेसर आ संस्थापक चेयरपर्सन डेरिक्स पी शुक्ला बतवलें कि हिमाचल प्रदेश के ग्लेशियर से बनल कइयन गो झीलन के आकार पिछिला एक दशक में 30 से 60 फीसदी तक बढ़ गइल बा।
एकरा से भविष्य में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) जइसन घटना के खतरा बढ़ सकेला। नेपाल में हाले में भइल तबाही के पीछे GLOF के एगाे प्रमुख कारण बतावल गइल बा।
बढ़त पर्यटन से ग्लेशियर पs पड़ रहल बा असर
शुक्ला के मोताबिक हिमालयी इलाका में बढ़त पर्यटन आ प्रदूषण के चलते ग्लेशियर तेजी से पिघल रहल बा। पहाड़ी इलाका में गाड़ी के आवाजाही आ इंसानी गतिविधियन से निकले वाला कार्बन आ धूल ग्लेशियर के ऊपर जमा हो जाला।
एकरा से बर्फ के सतह पs कारी परत बन जाला। ई कारी परत सूर्य के ऊर्जा के जादे मात्रा में सोखेला, जवना से ग्लेशियर के पिघले के रफ्तार आउर तेज हो जाला।
हिमालय में पर्माफ्रॉस्ट बन रहल बा खतरा
शुक्ला बतवलें कि हिमालयी क्षेत्र में पर्माफ्रॉस्ट मवजूद बा। पर्माफ्रॉस्ट धरती के नीचे मवजूद चट्टान, मिट्टी आ रेत के ऊ परत हs, जवन लमहर समय तक जमल रहेला।
तापमान बढ़ला पs जब पर्माफ्रॉस्ट पिघले लागेला तs जमीन के ऊपरी परत अस्थिर हो जाला। एहसे पहाड़ी इलाका में भूस्खलन आ आउर प्राकृतिक आपदा के खतरा बढ़ जाला।
नेपाल में आइल विनाशकारी बाढ़ के पीछे ग्लेशियर झील टूटे के संगे-संगे पर्माफ्रॉस्ट के पिघललो एगो महत्वपूर्ण कारण मानल जा रहल बा।
पहाड़ में विकास के काम नियंत्रित तरीका से जरूरी
शुक्ला के कहनाम बा कि पहाड़ी इलाका में कनेक्टिविटी बढ़ावे के प्रयास अच्छा बा, बाकिर विकास के काम नियंत्रित तरीका से होखे के चाहीं।
टनल आ सड़क बनला के बाद पहाड़ी इलाका में अब साल भर पर्यटक पहुंच रहल बाड़ें। एहसे ग्लेशियर पs प्रदूषण आ धूल के जमाव बढ़ रहल बा, जवन ग्लेशियर के पिघले के रफ्तार पs असर डाल सकेला।
NDMA चार खतरनाक झील के कइलस पहचान
शुक्ला के मोताबिक नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) हिमाचल प्रदेश में चार गो ग्लेशियल झील के पहचान कइले बा, जवना पs तुरंत धेयान देवे के जरूरत बा।
ओहिदा IIT मंडी कम से कम 9 झीलन के क्रिटिकल स्टेज में बतवले बा। रिसर्च के मोताबिक हिमाचल प्रदेश में पिछिला 10 साल में कइयन गो झीलन के दायरा 30 से 60 फीसदी तक बढ़ल बा।
NDMA के ओर से चिन्हित झील में घेपन झील, वासुकी झील, काशांग झील आ बास्पा के नजदीक एगो झील सामिल बा।
IIT मंडी के रिसर्च में 9 से 12 झीलन के गंभीर खतरा वाला श्रेणी में रखे के संभावना बतावल गइल बा। आम लोग खातिर सबसे जादे खतरा घेपन झील, योचे आ काली कुंड से बतावल गइल बा, काहेकि एह झीलन में लगातार बदलाव हो रहल बा आ हर साल एकर आकार बढ़ रहल बा।
वासुकी झील के आकार में बदलाव देखे के मिल रहल बा, बाकिर झील के नीचे कइयन किलोमीटर तक इंसानी बस्ती नइखे। एह वजह से एकरा से जुड़ल खतरा तुलनात्मक रूप से कम मानल जा रहल बा।
26 अगस्त के नेपाल में कइसे मचल तबाही?
IIT मंडी के रिसर्च नेपाल में आइल भयानक बाढ़ के पृष्ठभूमि में सामने आइल बा। नेपाल में 26 अगस्त के विनाशकारी बाढ़ के बाद ग्लेशियल झीलन के खतरा आउर गंभीर हो गइल बा।
वैज्ञानिकन के एगो थ्योरी के मोताबिक ग्लेशियर टूटे आ भूस्खलन के वजह से नेपाल में ई आपदा आइल। बतावल गइल कि ग्लेशियर के एगो हिस्सा ल्हेंदे खोला नदी में गिर गइल। एहसे एगो कृत्रिम झील बन गइल।
बाद में जब ई झील टूटल तs पानी के पूरा प्रवाह आगे भोटेकोशी नदी में चल गइल। भोटेकोशी, ल्हेंदे खोला के सहायक नदी हs आ चीन से नेपाल के ओर बहेला। एह नदी में आइल बाढ़ नेपाल में भारी तबाही मचा देलस।
टनल में फंसल लोगन के रेस्क्यू जारी
नेपाल में आइल आपदा के बाद हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के टनल में फंसल कर्मचारियन के बाहर निकाले के कोसिस जारी बा। कइयन गो टनल में माटी एतना भर गइल बा कि अंदर खाली जगह लगभग नइखे बचल।
रेस्क्यू टीम के सामने सबसे बड़ चुनौती ई बा कि कुछ टनल के हालत अइसन हो गइल बा, जइसे ट्यूब के भीतर पूरा टूथपेस्ट भर गइल होखे। एह वजह से ना तs आसानी से लोगन तक पहुंचल जा सकत बा आ ना ड्रोन के अंदर भेजल आसान बा।
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