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कॉपीराइट उल्लंघन गैर जमानती: कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट एगो फसीला में कहले बा कि कॉपीराइट कानून, 1957 के धारा 63 के तहत कॉपीराइट उल्लंघन के अपराध संज्ञेय आ गैर जमानती अपराध हs।

जस्टिस एमआर शाह आ जस्टिस बीवी नागराज के पीठ कहलस कि जदि अपराध 3-7 बरिस के सजा के जोग बा तs ऊ एगो संज्ञेय जुर्म हs।

अपीलकर्ता सीआरपीसी के धारा 156 (3) के तहत एगो मजिस्ट्रेट के सोझा आवेदन दायर कइले रहस। आईपीसी के धारा 420 के संगे कॉपीराइट अधिनयम के धारा 51, 63 आ 64 के तहत अपराधन ला प्रतिवादी/आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करे के निरदेस मंगले रहे। मजिस्ट्रेट ममिला के सही पवले आ पुलिस के प्राथमिकी दर्ज करे के आदेश देले। एकरा खिलाफ आरोपी दिल्ली हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कइलस। कहलस कि कॉपीराइट के धारा 63 गैर संज्ञेय आ जमानती अपराध हs।

ओहिजा एह अपराध के सीआरपीसी के पहिला अनुसूची के दूसरा भाग में जिकिर नइखे। हाईकोर्ट एफ़आईआर आ मजिस्ट्रेट के आदेश के निरस्त कs देलस। कहलस कि धारा 63 के तहत कइल गइल कृत्य गैर जमानती आ संज्ञेय अपराध ना हs। एह धारा में अधिकतम 6 साल आ सबसे कम 6 महीना के बा। एहीसे ई संज्ञेय अपराध नइखे। बाकिर शीर्ष अदालत हाईकोर्ट के फसीला के पलट देलस।

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