BRICS Summit : भारत दौरा पs आ सकेलें चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, पीएम मोदी के संगे द्विपक्षीय बैठक के संभावना

By Anurag Ranjan

Published on: Sep 10, 2026

सेंट्रल डेस्क। साल 2020 में गलवान घाटी में भारत आ चीनी सैनिकन के बीच भइल खूनी झड़प के बाद अब पहिला बेर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच औपचारिक द्विपक्षीय

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Xi Jinping India Visit and PM Modi Bilateral Meeting

सेंट्रल डेस्क। साल 2020 में गलवान घाटी में भारत आ चीनी सैनिकन के बीच भइल खूनी झड़प के बाद अब पहिला बेर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच औपचारिक द्विपक्षीय बैठक हो सकेला। मीडिया रिपोर्ट के मोताबिक, शी जिनपिंग नई दिल्ली में होखे जा रहल 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेवे खातिर सनिचर के भारत आ सकत बाड़ें। एह दौरा पs पूरा दुनिया के नजर टिकल बा।

भारत अबकि बेर 12 आ 13 सितंबर के दिल्ली में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मेजबानी करत बा। एह सिलसिला में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आ सकत बाड़ें। अगर जिनपिंग नई दिल्ली अइले, तs ई 2020 के सीमा विवाद आ गलवान झड़प के बाद उनकर पहिला भारत दौरा होई।

हालांकि, दुनु देस के बिदेस मंत्रालय अभी तक एह संभावित द्विपक्षीय बैठक के आधिकारिक पुष्टि नइखे कइले, बाकिर परदा के पीछे चल रहल कूटनीतिक गतिविधियन से मुलाकात के संभावना के संकेत मिल रहल बा।

गलवान के खूनी झड़प के बाद बदल गइल भारत-चीन के रिश्ता

जून 2020 में पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में दुनु देस के सैनिकन के बीच हिंसक झड़प भइल रहे। एह घटना में भारत आ चीन दुनु देस के सैनिकन के जान गइल रहे। एकरा बाद दुनु देस के राजनीतिक, आर्थिक आ कूटनीतिक संबंध बहुते खराब दौर में पहुंच गइल रहे।

हालांकि, पिछिला कुछ महीना में सैन्य आ कूटनीतिक बातचीत के माध्यम से सीमा के कइयन गो तनाव वाला इलाका से सेना पीछे हटावल गइल बा।

सीमा विवाद के बीच बातचीत के रास्ता खुली?

गलवान हिंसा के बाद भारत आ चीन सैन्य आ कूटनीतिक स्तर पs कइयन दौर के बातचीत कइल, ताकि सीमा पs तनाव कम कइल जा सके। हाले में कजाकिस्तान के बिश्केक में भइल एससीओ सम्मेलन में दुनु नेता एके मंच पs नजर आइल लो आ हाथो मिलावल, बाकिर उहां औपचारिक द्विपक्षीय बातचीत ना भइल रहे।

अब दिल्ली में होखे वाला संभावित बैठक के दुनु देसन के संबंध धीरे-धीरे सामान्य करे के दिशा में एगो महत्वपूर्ण डेग मानल जा रहल बा।

जिनपिंग के भारत आवे से पहिले परदा के पीछे चलल कूटनीति

शी जिनपिंग के भारत आवे से पहिले भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल चीन के दौरा कइले रहलें। एकरा अलावे भारत-चीन सीमा ममिला पs परामर्श आ समन्वय खातिर बनल वर्किंग मैकेनिज्म (डब्ल्यूएमसीसी) आ दुनु देसन के विशेष प्रतिनिधियन के बीच उच्चस्तरीय बातचीत भइल बा।एही बैठकन के आधार पs दुनु देस के शीर्ष नेता के संभावित मुलाकात खातिर माहौल तइयार भइल बा।

हालांकि, लद्दाख में तनाव कुछ कम भइल बा, बाकिर अरुणाचल प्रदेश के मुद्दा अभियो विवाद के विषय बनल बा। चीन अरुणाचल प्रदेश के ‘जंगनान’ माने दक्षिणी तिब्बत बतावेला, जबकि भारत चीन के एह दावा के लगातार खारिज करत आइल बा।

भारत दौरा पs आ रहल बाड़ें एंटोनियो गुटेरेस

दूसरा ओर, संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस एह हफ्ता भारत के दौरा पs नई दिल्ली आ रहल बाड़ें। ऊ 12 आ 13 सितंबर के होखे वाला 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिहें।

साल 2026 में भारत ब्रिक्स के अध्यक्षता करत बा। एह दौरान गुटेरेस 13 सितंबर के मुख्य सत्र के संबोधित करिहें। अपना भारत यात्रा के दौरान ऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कइयन गो वैश्विक नेता लोगन से द्विपक्षीय बैठक करिहें।

अपना संबोधन में एंटोनियो गुटेरेस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के वकालत कs सकेलें। उनकर माने के बा कि दुनिया के आर्थिक आ राजनीतिक हालात अब 1945 जइसन नइखे रहल। आज के समय में दुनिया के संतुलित बनावे खातिर अंतरराष्ट्रीय संस्थानन में बदलाव जरूरी बा।

भारत लमहर समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के मांग करत आइल बा। ब्रिक्स सम्मेलन में पश्चिम एशिया के संकट आ वैश्विक अर्थबेवस्था सहित कइयन गो महत्वपूर्ण मुद्दन पs चरचा होखे के संभावना बा।

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