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अबही नाम भइल बा थोरा जबही छूट गइल तन मोरा

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अबही नाम भइल बा थोड़ा जबही छूट गइल तन मोरा… से कहत भिखारी नाटक के समापन जरूर भइल बाकिर संवाद, अभिनय आ मंचन दर्शकन के मन के छू लेलस। नागरी नाटक मंडली के मंच पर पांच दिन के राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव के तीसरका साँझ रूपांतर नाट्य मंच, गोरखपुर के कहत भिखारी कृतियन, कथ्य आ गीतन के माध्यम से गंवई जिनगी के मार्मिक संवेदना, संघर्ष, जिजीविषा आ कलाप्रियता के साकार कइलस।

उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज के ओर से नाट्य प्रोत्साहन के तहत पांच दिन के राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव में तीसरका दिने बुध के मंचित नाटक में भिखारी ठाकुर के पात्र जीवंत भइल। कलाकार लोग देखावल कि कइसे भिखारी ठाकुर गांव के जुवा लोगन के अभिनय आ रामलीला के माध्यम से कला से जोड़ल चाहत बा, बाकिर लोग गाना-बजाना आ अभिनय के प्रतिष्ठा के विपरीत समझेला।

नाटक में भिखारी ठाकुर के धर्मपत्नी पूछेली कि नर्तकी नचनिया के पात्र बने वाला बाद में औरत बन जाला, बाकिर भिखारी ठाकुर उनका के आश्वस्त करत बाड़े। रामलीला आ बाद में बिरहा समूह के गठन के करत बाड़े। नाटक में अभिनय के संगे-संगे गायन हर केहू के पसंद आइल।

मंच पर मवजूद रहल ई कलाकार लोग

मंच पर भिखारी ठाकुर के भूमिका अपर्णेश मिश्रा निभवलें। एकरा आलावे हरिकेश पांडेय, प्रदीप सिंह, हरिकेश पांडेय, मनीष कुमार, निशिकांत पांडेय भूमिका निभावल जाई। प्रकाश राजनाथ वर्मा, निर्देशन सुनील जायसवाल, गायन विवेक श्रीवास्तव, हर्ष कुमार, कोरस शगुन श्रीवास्तव के रहले। एह दौरान डॉ० राजेंद्र उपाध्याय, रतिशंकर त्रिपाठी, सुमन पाठक, अनूप अरोड़ा, डॉ० हरेंद्र सिंह आदि मवजूद रहे लो।

एह गीतन में कहे भिखारी सार्थक सन्देश निहित रहे, जेमे  गांव के लोगन में शराब, नशा, मारपीट, घर के मेहरारूअन से क्लेश आदि सामाजिक पारिवारिक समस्यन के जीवंत कइल गइल। अंत में भिखारी ठाकुर के बाबूजी के भूमिका निभावे वाला निशिकांत पांडेय के सम्मान कइल गइल। संचालन डॉ० प्रीतेश आचार्य आ सहजोग प्रो० सुरेश शर्मा आ अतुल सिंह कइल लोग।

 

 

 

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