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मां सरस्वती के प्रतिमन के अंतिम रूप देवे लागल मूर्तिकार

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बसंत के आहट होखतही मौसम के मिजाज बदले लागल बा। खुलल घाम आ धूरा भरल हवा चले लागल बा। बसंत पंचमी के सरस्वती पूजा खातिर मूर्ति निर्माण कs रहल मूर्तिकारन के चेहरा खिल उठल बा। तेज घाम मूर्ति निर्माण खातिर लाभकारी साबित हो रहल बा। एकरा के मूर्ति निर्माण में तेजी आ गइल बा।

14 फरवरी के बसंत पंचमी के अवसर पs सरस्वती पूजा आयोजित कइल जाई। मूर्तिकार प्रतिमा के माटी सूखला के कारण रंग- रोगन में लग गइल बा। दिघवा दुबौली में मूर्ति निर्माण कs रहल सिरसा सर्वोदय टोला के मूर्तिकार अनारमा राम बतावत बाड़ें कि पिछला तीन पुस्त से उनकर परिवार सरस्वती प्रतिमन के निर्माण कs रहल बा। बाबूजी विश्वनाथ राम मूर्ति के निर्माण करत रहलें। अब बेटा अर्जुनो मूर्ति बनावेले। ऊ बतवलें कि सरस्वती प्रतिमन के निर्माण कs के ऊ सुकून के अनुभव करत बाड़ें।

दिघवा दुबौली बाजार में फिलहाल दु हजार से बेसी सरस्वती प्रतिमन के निर्माण हो रहल बा। इहां से निर्मित प्रतिमा सीमावर्ती पूर्वी चंपारण, सीवान, सारण आ मुजफ्फरपुर के इलाकन में ऑर्डर पs श्रद्धालु ले जात बा लो। बाजार में अबकी बेर 500 से लेके ढाई हजार रुपिया तक के सरस्वती प्रतिमन के निर्माण कइल जा रहल बा। मूर्तियन के कीमत पिछला बरिस से 25 प्रतिशत अबकी बेर जादे हो गइल बा। पिछला बरिस दु हजार से चार सौ रुपिया तक के मूर्तियन के आर्डर मूर्तिकार लेले रहे लो। अबकी बेर सरस्वती प्रतिमन पs 25 प्रतिशत महंगाई के मार बा। महंगाई के वजह से मूर्तियन के संख्यो अबकी बेर पिछला बरिस के तुलना कम हो गइल बा।

साज-सज्जा के सामग्री पs महंगाई मूर्ति सजावे वाला सामग्री आ कपड़ा के महंगाई जादे बा। प्रतिमन के निर्माण में सामग्रियन के महंगाई मूर्तिकारन खातिर परेसानी के कारण बन गइल बा।

मूर्तिकार धनंजय कुमार बतवलें कि सुतरी, पुआल, माटी, रंग-पेंट, सजावट के सामान, कपड़ा सहित आउर सामग्रियन पs महंगाई के मार बा। छोटी मूर्ति सजावे में दु सौ रुपिया तक खर्च पहिले आवत रहे। अब छोट मूर्तियन के सजावट पs तीन सौ तक के खर्च आ रहल बा। बड़ मूर्तियों के सजावट पs एक हजार से 15 सौ रुपिया खर्च बा। जवना से मूर्तियन के कीमत बढ़ावे के पड़ रहल बा।

पिछला बरिस के तुलना में 25 प्रतिशत बेसी महंगाई के लेके मूर्तिकार आ ग्राहकन के बीच मोल-भाव हो रहल बा। मध्यम दरजा के सरस्वती प्रतिमा श्रद्धालुअन के पहिला पसंद साबित हो रहल बा।

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