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Patna: कैंसर मरीजन खातिर नया बेवस्था सुरू करे जा रहल महावीर कैंसर संस्थान, स्थापित होई हॉस्पिस केयर

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पटना के महावीर कैंसर संस्थान विश्व स्वास्थ्य मानचित्र पs सफलतापूर्वक स्थापित होखला के बाद अब संस्थान कैंसर के अलग-अलग रूपन से जूझ रहल रोगियन के इलाज खातिर देस के सबसे बड़ धर्मशाला (Hospice Care) बनावे खातिर तइयार बा। एह हॉस्पिस केयर के निर्माण महावीर मंदिर न्यास समिति के जमीन पs कइल जाई, जवन पटना एम्स से पहिले पटना – औरंगाबाद मुख्य मार्ग पs बोचाचक में इस्थित बा।

100 बेड के हॉस्पिस केयर के होई निर्माण

महावीर कैंसर संस्थान द्वारा 100 बेड के एह अस्पताल के निर्माण तीन करोड़ रुपिया के लागत से करावल जा रहल बा। निर्माण कार्य के ई राशि केंद्र सरकार द्वारा दिहल गइल फंड भा महावीर मंदिर द्वारा दिहल गइल दान से प्राप्त होई। कैंसर से एह लड़ाई में अस्पताल स्वैच्छिक(volunteer) स्वास्थ कार्यकर्ता, सामाजिक कार्यकर्ता, मनोवैज्ञानिकन आ योग प्रशिक्षकन के संगे मिलके काम करी ताकि कैंसर जइसन गंभीर रोग से जूझ रहल रोगियन आ ओह लो के परिवार के सदस्यन के सही माहौल आ वातावरण प्रदान कइल जा सकी। अस्पताल में होम्योपैथी, यूनानी आ आयुर्वेदिक सुविधन के साथे वैकल्पिक चिकित्सा केंद्रो होई।

एगो विस्तारित अस्पतालो के निर्माण कइल जाई

महावीर मन्दिर न्यास समिति के सचिव आचार्य किशोर कुणाल 100 बेड के एह धर्मशाला (Hospice Care) के निर्माण करावे जा रहल बा। जवन राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी के सहजोग से जल्दिये सुरू हो जाई। एकरा संगही हॉस्पिस केयर के लगही महावीर कैंसर संस्थान के एगो विस्तारित अस्पताल के निर्माण कइल जाई।

कंकड़बाग में 51 बेड वाला हॉस्पिस केयर

महावीर कैंसर संस्थान हाले में पटना के कंकड़बाग इलाका में किराया के एगो भवन में 51 बेड वाला धर्मशाला (Hospice Care) स्थापित करे के निर्णय लिहल गइल बा। एह हॉस्पिस केयर में महावीर कैंसर संस्थान के अनुभवी डॉक्टरन आ नर्सन द्वारा कैंसर रोगियन के देखभाल कइल जाई।

देश के दूसरका सबसे बड़ कैंसर अस्पताल हs महावीर कैंसर संस्थान

पटना के फुलवारी शरीफ में देस का दूसरका सबसे बड़ कैंसर अस्पताल ‘महावीर कैंसर संस्थान’ इस्थित बा। इहां बड़ संख्या में कैंसर मरीज इलाज करवावेला लो। कइयन बेर परिजन कैंसर पीड़ित के इलाज करावे भा देखभाल करे में आर्थिक रूप से असमर्थ होला। अइसन में जिनगी के आखिरी पड़ाव में कइयन बेर कैंसर पीड़ितन के सही देखभाल ना हो पावेला। एही बात के धेयान राखत आचार्य किशोर कुणाल हॉस्पिस केयर के निर्माण के निर्णय लेले बाड़े। ई अस्पताल राज्य में अपना तरे के पहिला अस्पताल होई जवन कैंसर रोगियन के सेवा करी।

का हs हॉस्पिस केयर

कवनो व्यक्ति के जिनगी के अंतिम समय में पेशेवर आ स्वयंसेवकन द्वारा दिहल जाये वाला देखभाल के हॉस्पिस केयर कहल जाला। देखभाल करे वाला लोग मरीज के दरद आउर लक्षण के नियंत्रित करेला लो ताकि मरीज आराम से रह सके। आम तौर पs हॉस्पिस केयर में ऊ व्यक्ति रहेला। जिनकर जिये के उम्मीद छव महीना भा ओकरो से कम होला।

साभार: प्रभात खबर

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