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जानीं काहें असुभ मानल जाला होली के पहिले के आठ दिन

का बा एकर कारन, आइल जानल जा

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होली से पहिले आला आठ दिन के अशुभ मानल जाला। ए दिन में कब्बो शुभ काम नाइ कइल जाला। एही के होलाष्टक कहल जाला। जौन ए बेर 10 से 17 मार्च, बियफ्फे ले रही। ए दिन में भगवान कृष्ण के मंदिर में विशेष पूजा-श्रंगार के संगे उत्सव मनावल जाला। भक्ति अउर पूजा-पाठ के नजरिया से त ई समय खास होता है। लेकिन इन दिन के असुभ मनले के पीछे दू कथा बतावल जाला। जेमें एगो शिवजी से जुड़ल बा। दूसरका, भगवान विष्णु अउर उनके भक्त प्रह्ललाद से। जानीं का है होलाष्टक के अशुभ मनले के वजह…

प्रह्लाद को 8 दिन देहल गइल रहे यातना
पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्रह्लाद बचपने से भगवान विष्णु के अनन्य भक्त रहनें। ई देख उनके पिता हिरण्यकश्यप  उनके गुरु से कहनें, कुछ अइसन करs कि ये विष्णु के नाम रटल बंद कs दे। बहुत कोशिश के बादो गुरु असफल रहनें। तब असुरराज अपने लइका के हत्या के आदेस दे देहनें। प्रह्लाद के जहर पियावल गइल, तलवार से प्रहार कइल गइल,  नाग के आगे छोड़ल गइल, हाथी से कचरवावल चाहल, लेकिन हर बेर भगवान प्रह्लाद के जान बचवने।

मान्यता ह कि होली से पहिले के आठ दिन यानी अष्टमी से पूर्णिमा ले प्रहलाद को बड़ी यातना देहल गइल रहे। एही के याद में होलाष्टक मनावल जाला। अंत में होलिका प्रह्लाद के लेके आग में घुस गइली, लेकिन प्रह्लाद बच गइनें अउर ऊ खुदे जल गइली।

शिव के क्रोध से भस्म हुए कामदेव
एगो दूसर कथा के अनुसार हिमालय पुत्री पार्वती चाहत रहली कि उनकर वियाह भोलेनाथ से होखे, लेकिन शिवजी अपने तपस्या में लीन रहनें। तब कामदेव पार्वती के सहायता करे अइनें। ऊ प्रेम बाण चलवनें अउर शिव के तपस्या भंग हो गइल। शिवजी के खीस बरल अउर ऊ आपन तीसरका आंख खोल देहनें। कामदेव के देह उनके क्रोध के आग में भसम हो गइल। फिर शिवजी पार्वती के देखनें। पार्वती के आराधना सफल भइल अउर शिवजी ओनके पत्नी के रूप में अपना लेहनें।

का न करीं

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होलाष्टक के 8 दिनों के दौरान खासतौर पs शादी, गृह-प्रवेश, मुंडन अउर दूसर सुभ काम कइल मिनहा होला। संगही एह दौरान अंतिम संस्कार के छोड़ के सगरी संस्कारन के कइल मिनहा होला। होलाष्टक के दौरान सगाई, गोद भराई अउर ग्रह शांतिओ नाइ कइल जाला। ए दिन में बहु या बेटी अपने माता-पिता के घरहूँ नाई जाली|

 

साभार – दैनिक भास्कर

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