गोरखपुर। भोजपुरी संगम के 199वीं ‘बइठकी’ गोरखपुर के बशारतपुर इस्थित खरैया पोखरा में स्व. सत्तन जी के आवास पs दूगाे सत्र में सम्पन्न भइल। कार्यक्रम के अध्यक्षता वरिष्ठ भोजपुरी साहित्यकार चंदेश्वर ‘परवाना’ जी कइनीं, जबकि संचालन नंद ‘गोरखपुरी’ जी कइनीं।
‘प्रेम के दुश्मन पइसा’ कहानी पs भइल चरचा
पहिलका सत्र में विशिष्ट अतिथि सत्य प्रकाश शुक्ला ‘बाबा’ जी के भोजपुरी कहानी ‘प्रेम के दुश्मन पइसा’ पs समीक्षा आ चरचा भइल।
फाजिलनगर के समीक्षक भूपेंद्र राय गँवार जी कहानी के बेजोड़ बतावत कहनीं कि ई रचना पुरान संस्कृति, पारिवारिक मूल्य आ नाता-रिश्ता के मिठास पs पइसा के लोभ के बढ़त असर के गंभीर सनेस देतिया।
दोसर समीक्षक सुधीर श्रीवास्तव ‘नीरज’ जी कहानी के मार्मिक बतवनीं। उनका मुताबिक, रचना में पारिवारिक मूल्य पs आधुनिकता के पड़त असर के भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत कइल गइल बा। एह दौरान मवजूद लोग कहानी के आउर बेवहारिक बनावे खातिर कइयन गो सुझाव दिहल आ सत्य प्रकाश शुक्ला ‘बाबा’ जी के संदेशपरक कहानी खातिर बधाई दिहल।
वाणी वंदना से सुरू भइल दुसरका सत्र
दुसरका सत्र के सुरुआत सुधीर श्रीवास्तव ‘नीरज’ जी के वाणी वंदना से भइल। ऊ प्रस्तुत कइनीं- “ज्ञानदायिनी, हंस वाहिनी, वीणा वादिनी के अभिनंदन।”
एह सत्र में कौशर गोरखपुरी जी माई के महिमा पs आधारित रचना प्रस्तुत कइनीं। उनका रचना में माई के ममता आ स्नेह के भाव देखे के मिलल।
डॉ. फूलचंद प्रसाद गुप्त जी के व्यंग्यात्मक दोहा खूब सराहल गइल। उनका दोहा के माध्यम से सामाजिक विडंबना पs व्यंग्य कइल गइल।
संयोजक कुमार अभिनीत जी स्व. सत्तन जी के रचना ‘राम रहारी’ के सस्वर पाठ कs के उनका के इयाद कइनीं। सत्य प्रकाश शुक्ला जी के सोहर उपस्थित लोगन के खूब पसंद आइल।
गांव से शहर पलायन के पीड़ा के उठल सवाल
बइठकी में वरिष्ठ भोजपुरी साहित्यकार चंदेश्वर ‘परवाना’ जी गांव से शहर के ओर हो रहल पलायन के पीड़ा के प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कइनीं। उनका रचना में गांव के खाली होत घर आ बंद पड़त दरवाजन के माध्यम से पलायन के सामाजिक असर के चित्रण कइल गइल।
एह दौरान भूपेंद्र राय गंवार, ओमप्रकाश पाण्डेय ‘आचार्य’, डॉ. अजय अंजान, निर्मल कुमार गुप्त, रामसमुझ सांवरा, अवधेश शर्मा नंद, नर्वदेश्वर सिंह आ वागेश्वरी प्रसाद मिश्र ‘वागीश’ जी आपन-आपन प्रतिनिधि रचना प्रस्तुत कs के बइठकी के समृद्ध कइनीं।
कार्यक्रम में रवीन्द्र मोहन त्रिपाठी आ डॉ. विनीत कुमार मिश्र जी के उपस्थिति महत्वपूर्ण रहल। अंत में संस्था के संरक्षक इं. राजेश्वर सिंह जी सब लोगन के प्रति आभार व्यक्त कइनीं।






