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वाराणसी : शवदाह गृह में जरत चिता के बीच शहर के वैश्या काहे नाचेले? कारण जान रउरा अचरज में पड़ जाएम

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यूपी के वाराणसी में एगो अनोखा परंपरा बा, इहाँ नवरात्रि के सप्तमी के दिन शहर के दुल्हिन जरत चिता के बीच नाचेले, जान जा कि अयीसन काहें होखेला…

 

हमनी के देश विविधता के देश ह, इहाँ एगो कहावत बा कि हर मील पर पानी ना बदले के चाहीं, हर मील पर बोलचाल बदले के चाहीं । हमनी के उत्तर प्रदेश में अइसन अलग संस्कृति बा। लगभग हर जिला में कवनो ना कवनो प्राचीन मंदिर बा आ ओकरा से जुड़ल संस्कृति आ मान्यता बा । अइसने एगो अनोखा परंपरा काशी भा वाराणसी में बा जवन देवो के देव महादेव के नगर ह जवना में शहर के दुल्हिन श्मशान घाट में जरत चिता के बीच नाचेले आ हजारन लोग ओह चिता के देखे खातिर जुटेला । जिला के चैत्र नवरात्रि के सप्तमी तिथि प मणिकर्णिका घाट दाह संस्कार स्थल के ई अनूठा परंपरा राजा मानसिंह के समय से शुरू भइल रहे।

राजा के बोलावे प मशहूर कलाकार ना अइले

उहो जब राजा मणिकर्णिका घाट पर मसन्नाथ शवदाह गृह मंदिर के जीर्णोद्धार कइलन आ ओही परब में सांस्कृतिक कार्यक्रम खातिर कई गो नामी कलाकारन के बोलावल गइल बाकिर जब केहू ना आइल त ओह घरी के वेश्या राजा मान सिंह के नेवता स्वीकार क के काशी में मणिकर्णिका महासंस्कार के सांस्कृतिक कार्यक्रम में आपन कला के प्रदर्शन कइली । तब से उहाँ के नगर वधू के नाम से जानल जाए लागल।

 परंपरा बरिसन से चलत आ रहल बा

तब से आज ले महाशमशान के एह परब में देश के कई हिस्सा से आवे वाली नगर कन्या लोग स्वेच्छा से एह परम्परा के अंजाम देवे आवेला, निशुल्क, पहिले महाशंशन बाबा के सामने नाचेला आ फेर जरत चिता के बीच आपन कला के प्रदर्शन करेला एकरा के देखे खातिर बड़हन संख्या में लोग एह प्रस्तुति में शामिल होला । मिलल जानकारी के मुताबिक नगर कन्या अपना नाच के माध्यम से दाह संस्कार स्थल के मंदिर में इच्छा जतावेली कि अगिला जन्म में हमनी के ए जीवन से राहत मिले आ गुण के प्राप्ति होखे।

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