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आवाज के जादूगर मोहम्मद रफ़ी साहब के पुण्यतिथि पर विशेष

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हमार अज़ीज़ गायक जेके हम बहुते पसंद करेनीं, काल्ह मोहम्मद रफ़ी साहब के पुण्यतिथि ह। अपने करियर में रफ़ी साहब लगभग 7400 गाना गवलें जेमें से 4334 गाना हिंदी में गवनें। उनके 4 बेर फिल्म फेयर अवार्ड भी मिलल अउरी 1965 में उनके पद्मश्री से नवाजल गइल।

रफी साहब के जीवन के कई दिलचस्प किस्सा बा जेमें से एक किस्सा उनके शुरुआती दिन के ह। भइल ई कि ओह जमाना के बड़ गायक अउरी एक्टर K. L सहगल साहब के संगीत, साहित्य अउरी संस्कृति के शहर लाहौर में एक म्यूजिक शो रहल, तब विभाजन नाइ भइल रहल। K. L सहगल साहब ओह जमाना में बड़ नाम रहललें लिहाजा काफी भीड़ जमा रहल तब्बे लाइट भाग गईल त आयोजक K. L सहगल साहब के होटल पर ही रुके खातिर कहलें जब ले कि लाइट नाइ आ जाए। काफी देर हो गइल लेकिन लाइट नाइ आइल। भीड़ काफी ज्यादा रहल , अब लोग के सब्र के बांध टूटत रहल। भीड़ में धीरे-धीरे हलचल मचे लागल। आयोजकन के माथा पर पसीना आ गइल रहे। तब्बे रफी साहब के बड़ भाई दीन मोहम्मद आयोजकन से 13 साल के मोहम्मद रफी के ओर अंगुरी से इशारा करत कहलें कि ओह लइका के तब ले स्टेज पर चढ़ा दिहल जाय। महज़ 13 साल के रफी साहब के एगो अइसन मंच मिलल रहे जहां सामने बड़ तादाद में भीड़ रहल अउरी माइक भी नाइ रहल लेकिन बिना माइक के ही घण्टा भर रफी साहब गाना गवलें अउरी अइसन रंग जमवलें कि लोग ई भुला गइल कि ऊ K. L सहगल साहब के सुने आइल रहल।

म्यूजिक डायरेक्टर श्याम सुंदर भी एही शो में रहले, उ रफी साहब से पूछले कि रउवा फिल्म खातिर काहे ना गावेनी, त रफी साहब के पहिला गाना श्याम सुंदर के चलते मिलल, इ एगो पंजाबी फिल्म रहे जवना खातिर ऊ ई गाना गवले रहले।

तब रफी साहब मुंबई आके मुंबई में चौल में रहत रहले, एतना लोग ओहिजा रहत रहे, त रफी साहब के रियाज करे में बहुत दिक्कत होखत रहे, एही से रफी ​​साहब रोज सबेरे समुद्र तट पर जुहू बीच पर जात रहले। जब उ रियाज करत रहले त उनकर आवाज चारो ओर गुंजायमान होखत रहे। जुहू समुद्र तट पर मशहूर गायिका सुरैया के घर रहे। रफी साहब के आवाज सुन के सुरैया के इ जाने के मन कईलस कि के एतना बढ़िया से गावेला, सबेरे-सबेरे उनुका पता चलल कि रफी साहब उहाँ बाड़े अउरी उ रियाज करे खातिर समुंदर के किनारे आवतारे। तब सूरैया रफी साहब से कहली कि तू हमरा संगे रहऽ, इहां तोहरा रियाज करे में कवनो दिक्कत ना होई आ हमरा भी पसंद आई।

संगीतकार नौशाद के साथे रफी ​​साहब के जुगलबंदी काफी अच्छा रहल। रफी साहब पहिला बेर नौशाद खातिर “पहले आप” फिलिम में गवले, जवना खातिर उनुका नौशाद से 1 रुपया मिलल। उ 1 रुपया रफी साहब जी के जीवन के अंतिम चरण तक रखल गईल रहे। साल 1946 में “अनमोल घड़ी” सिनेमा में रफी जी गीत “तेरा खिलौना टूटे रे बालक” गवले रहे जवन नौशाद के रहे, रफी साहब के पहिला गाना रहे जवन बढ़िया से चलल।

रफी साहब के ईमानदारी आ ईमानदारी भी बहुत मशहूर रहल बा एक बेर जितेन्द्र के फिल्म खातिर एगो गाना रहे जवना में रफी साहब भी रहले अउरी किशोर कुमार भी रहले। चूँकि फिलिम के निर्माण शुरू भइला का बाद बीच में कुछ साल ले रोक दिहल गइल. फेर जब फिलिम पूरा तरह से तइयार हो गइल, काहे कि एह फिलिम में बहुते साल लागल त जितेन्द्र रफी साहब आ किशोर कुमार दुनु जने के जवन बात कइले रहुवे ओकरा से बेसी भुगतान भेज दिहलन बाकिर रफी साहब ई कहत भुगतान लवटा दिहलन कि The payment is more than what के चर्चा भइल.

रफी साहब बिना केहु के जानकारी देले गरीब अउरी जरूरतमंद के मदद करत रहले। तब पता चलल कि रफी साहब ओह लोग के हर महीना पइसा भेजत रहले बाकिर कई महीना ले जब पइसा ना चहुँपल त ई लोग पूछे आइल रहुवे. तब पता चलल कि रफी साहब में न खाली एगो बढ़िया गायकी बा बलुक दान के भी परम गुण बा।

रफी साहब के गावल कालजयी गीत, जवन हर दौर में लइका, बुढ़वा आ नवहियन के जीवन जीए के तरीका बा। एकांत में जब मन खाली हो जाला त उनकर गीत “आज मौसम बड़ा बेईमान है” जीभ पर आ जाला। जब कवनो आदमी के प्यार होला त ऊ गुनगुनाए लागेला “ये रेशमी जुल्फे, ये शर्बती आंखें”, “कितना वादा है इन मतवाली आँखों का “प्यार में ठुकरावल गइल आदमी “पत्थर के सनम तुझे हमने मोहब्बत का खुदा जाना” सुने लागेला। प्रेम में अनंत काल आ शांति के खोज करत घरी कवनो आदमी के पसंदीदा गीतन में “चाहूँगा मैं तुझे साँझ सवेरे, फिर भी कभी अब नाम को तेरे, आवाज मैं न दूँगा” आ “अकेले हैं चले आओ जहाँ हो, कहाँ आवाज दें तुमको, कहाँ हो।” शुमार हो जावे, ई पते नाइ चले।

गीत त खाली देह रहे बाकिर रफी साहब अपना आवाज आ आत्मा से ओह गीतन के कालजयी बना दिहले. रफी साहब त गइलें बाकि उनकर आवाज में जवन गीत बा उ अमर हो गइल बा। रफी साहब के एतना गाना के जिक्र कइल जाव, हर गीत के आपन सुरूर होला, आपन रंग होला, आपन नशा होला, आपन विरह होला.

रफी साहब के पुण्यतिथि पर हमरा जइसन करोड़ो प्रशंसकन के तरफ़ से रफी साहब के लाखो बेर प्रणाम बा.❣️🙏
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जावेद खान ‘अमन’

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