सूइये तागा जोड़े में उजर गईल जिनिगी (कविता) मैकश के कलम से

Anurag Ranjan

कोइला के धाह में ककड़ गईल जिनिगी
सूइये तागा जोड़े में उजर गईल जिनिगी

लईकाई में हमरो बड़ बड़ कहानी रहे
एगो नाय रहे आ छाती भर पानी रहे
आन्ही पानी आईल कबड़ गईल जिनिगी
सूइये तागा जोड़े में उजर गईल जिनिगी

जे मन के हिरिख रहे , रह गईल मने में
पर पगलेट अदमी, फंसल रहल धने में
मरलस समे झठहा जस झड़ गईल जिनिगी
सूइये तागा जोड़े में उजर गईल जिनिगी

चूरूवा भर साँस बा, घोंट घोंट पिये के बा
एगो जिनगी में,केतना जिनगी जिये के बा
धरे – धरे में हाथ से ससर गईल जिनिगी
सूइये तागा जोड़े में उजर गईल जिनिगी

जान बावे कम ,अरमान अभी जादा बाटे
घाव बा पुरान , निशान अभी जादा बाटे
एहर ओहर सगरे.. पसर गइल जिनिगी
सूइये तागा जोड़े में उजर गईल जिनिगी

मैकश के परिचय

गांव के माटी-पानी में सनाइल एगो नब्बे के दशक के भारतीय जवना के आपन भाषा आ संस्कृति में अटूट विश्वास आ लगाव बा। ‘मैक़श’ के परिचय इंहा एगो अइसन साधारण आ जमीन से जुड़ल नवसिखुआ लइका से बा जवना के कलम आ शब्द नवहन के बात करेला। उ संवेदना, भाव आ अंदाज के लिखे के एगो छोटहन कोसिस जवना के समाज आ लोग साधारणतः नजरअंदाज क देला।

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सिविल इंजीनियर, भोजपुरिया, लेखक, ब्लॉगर आ कमेंटेटर। खेल के दुनिया से खास लगाव। परिचे- एगो निठाह समर्पित भोजपुरिया, जवन भोजपुरी के विकास ला लगातार प्रयासरत बा। खबर भोजपुरी के एह पोर्टल पs हमार कुछ खास लेख आ रचना रउआ सभे के पढ़े के मिली। रउआ सभे हमरा के आपन सुझाव anuragranjan1998@gmail.com पs मेल करीं।