बिजनेस डेस्क। भारतीय अर्थव्यवस्था के बढ़े के रफ्तार चालू वित्त बरिस 2025-26 के पहिला तिमाही में आरबीआई के 6.5 फीसदी के अनुमान से जादे रह सकत बा। ओहिजा, आउर एजेंसी बढ़न्ती दर एकरा से जादे रहे के अनुमान लगवले बाड़ी सs। इक्रा पहिला तिमाही खातिर 6.7 फीसदी के अनुमान देले बा। एसबीआई रिसर्च के अनुमान 6.8 से 7 फीसदी तक के बा। रॉयटर्स के सर्वे के मोताबिक, पहिला तिमाही के अर्थव्यवस्था के रफ्तार 6.7 फीसदी रह सकत बा।
सरकार पहिला तिमाही के जीडीपी के आंकड़ा सुक के सांझ पांच बजे जारी करी। अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ लागू होखला के बाद पहिला तिमाही के मजबूत आंकड़न से बाजार पूरा वित्त बरिस के तस्वीर देखे के कोसिस करी। जीडीपी आंकड़न में खास नजर निजी खपत आ मांग पs होई। वर्तमान इस्थिति में ई देखल जरूरी होई कि भारत निजी खपत आ मांग के मोर्चा पs कइसन प्रदर्शन कइले बा। ऊंचा टैरिफ के वजह से घटत निर्यात के बीच अब घरेलू मांग आ खपत अर्थव्यवस्था ले मजबूत वृद्धि के समर्थन कs सकत बा।
पूंजीगत खर्च से अर्थव्यवस्था के मिली सहारा
सरकारी पूंजीगत खर्च में सालाना 52 फीसद के उल्लेख जोग बढ़न्ती पहिला तिमाही में आर्थिक गतिविधियन के बढ़ावा देले बा। ई खर्च नौकरियन के सृजन, बुनियादी ढांचा के विकास, सीमेंट, स्टील आ इंजीनियरिंग सामानन के मांग के प्रोत्साहित कइले बा। केंद्र सरकार के पूंजीगत खर्च 2.8 लाख करोड़ रुपिया तक पहुंच गइल, जवन पिछला साल के तुलना में बहुत जादे बा। ई बढ़न्ती निजी क्षेत्र के निवेश में कमी के संतुलित करे में महत्वपूर्ण रहल बा।
ग्रामीण मांग आ कृषि में सुधार के उम्मेद
ग्रामीण क्षेत्रन में खपत में उछाल से शहरी मांग के कमजोरी संतुलित होखे के उम्मीद बा। अनुकूल मानसून आ रिकॉर्ड फसल उत्पादन से ग्रामीण आय बढ़ल बा, जवना से एफएमसीजी, कृषि उपकरण आ ग्रामीण खुदरा क्षेत्र में तेजी आ सकत बा।
टैरिफ के आगे दिख सकत बा असर
पहिला तिमाही टैरिफ से जादे प्रभावित नइखे भइल, एहिसे अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन मजबूत रह सकत बा। दूसरका तिमाही से पूरा असर होई। एकरा से 2025-26 में बढ़न्ती दर घटके 6.3 से 6.5 फीसदी के बीच रह सकत बा। बेयपार तनाव आ निजी निवेश में कमी के असर रही।