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फोटोफोबिया के शिकार आज के पीढ़ी, बदलत समाज मे ई केतना बा सही

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मोबाइल में कैमरा आ गइले के बाद हमनी के सब जनी फोटोजीवी हो चुकल बानीं जा। ज्यादातर फोटोजीवी एगो ख़ालिस ख़ास एंगल जोहे ली जॉ जेमें बेहतर नज़र आवत होखीं, यानी असली से निम्मन। बहुत लोग त अइसनो बा जे एंगल नाइ समझsला। फोटो खिंचावे के बा, त खिंचा लेहने।

एंगल के बाद फोटो छटले के चरण शुरू होला। दस, बीस, सौ, पचास में कौनो एक! एकरे बाद फिल्टर लागsला। लाइट-कंट्रास्ट एडजेस्ट कइल जाला। क्रॉपिंग सबसे जरूरी होला! हर दूसरा मोबाइलधारक तनी-मनी प्रोफेशनल फोटोग्राफर हो चुकल बा।

तस्वीर फिल्टर कइल असलियत ढांके से का कम बा। ऊ व्यक्ति जौन अपना के फोटोजेनिक नाइ मानsला अउरी कहsला कि हमके फोटो उतरववले में तनिको दिलचस्पी नाइ बा, उहों प्रोफाइल पिक्चर बड़ी छांटके डारsला।

खैर, हमके रणवीर सिंह के नग्न शरीर दिखवले में बुराई नाइ लागsला। उ शायद स्वयं के नग्न अवतार पर मोहित होखें। नंगा हो गइल नंगई नाइ होला। विदेशन के फिल्मी सितारे चलत फिल्म में कपड़े उतरले से नाइ कतरालें। हर दूसर फिल्म में प्राकृतिक अवस्था पावल जा सकsला।

पुराने दिन में केंट विसलेंट के स्कैच बनवावे खातिर कपड़ा उतार के सोफ़ा पर लेटल (टाइटेनिक) परंपरागत भारतीय सिने दर्शकन खातिर क्लासिक सीन ह। राम तेरी गंगा मैली में मंदाकिनी के झरना के नीचे नहाइल अउरी सत्यम शिवम सुंदरम में जीनत अमान के खुलापन हमनीके बड़कवन के पता नाइ कइसन लागल होखे लेकिन फिलिम खूब चलल रहे।

इंटरनेट दुनिया के बदल देहले बा। रउआ ओसे ताल मिलाई चाहे दूर चल जाईं। बच्चा सब भी हिपोक्रेसी पकड़ लेवे ने सब। आइना से पूछी कि रउआ में दस – बीस …केतना आदमी छुपल बानें।

 

अतः तापस

(टिप्पणीकार वरिष्ठ पत्रकार हवें)

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