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आधार बनववला के कवनो उपाय नाही दिखत बा

300-400 रूपिया देले बिना आधार बनल मुसकिल बा...

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पिपरौली गीडा (दीपक त्रिपाठी):   भारत सरकार के मंशा के मोताबिक विकास के कामन् से आधार कार्ड से लिंक रहले पs जुड़ल जा सकत बा। आधार कार्ड से ऑनलाइन डिजिटल प्रणाली के तहत योजना सब से जुड़ल जा सकेला। आधार कार्ड कृषि से लेके शिक्षा आ बेवसाय तक मान्यता देवे के काम सुरू हो गइल बा। एकरा बादो जिम्मेदार लोग आधार बनावे खातिर बेखबर बनल बा लो।

 

ग्रामीण क्षेत्रन् में आधार बनावे में भारी धन उगाही कइल जात बा

गौर करे आला बात बा कि मेक इन इंडिया में सब काम डिजिटली कइल जा रहल बा। बिना आधार के लईकन के स्कूलन में नाव लिखवावल, बैंक खाता खोलवावल, राशन कार्ड बोलवावल, बैंक से लेन-देन कइल, किसानन के खाद-बिया -खेती से जुड़ल यंत्र, जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र समेत सब काम आधार कार्ड से कइल अनिवार्य कs देहल गइल बा। आधार कार्ड के बिना एको काम नइखे हो सकत। आधार बिना 300-400 रूपिया देहले नइखे बन पावत।

 

जनता के सोझा समस्या बनल बा

मोहन सिंह उसका मल्हिपुर बतवले कि आधार कार्ड सब काम में लागत बा। बाकिर बनवावल बहुते मुसकिल बा। जिला से आधार बनववला के जगे जदि ब्लॉक स्तर से हो जाईत तs आसानी से बनवावल जा सकेला आ आधुनिक भारत से जुड़े में सफलता मिलित।

कमलेश निषाद कोल्हुई कहले कि आधार कार्ड के भूमिका सब जगे खास मानल जा रहल बा। बाकिर बनवा लेहल एगो टेढ़ खीर बा। पहिले जगे-जगे बनत रहे। ओ घरी कुछ बनल तबो ओमे केहु के नाव, जन्मतिथि, पता गलत हो गइल बा। बदलवावे ला सभे परेसान बा। ठीक ना होखला के वजे से कइयन लो के बैंक से लेके राशन तक परेसानी हो रहल बा।

राम आशीष गोड़ बतवले कि योजना के लाभ हमनी सभे के नइखे मिल पावत। काहेकि हमनी के ग्रामीण जनता पहुँच नइखे पावत। एकर बेवस्था बना के एह ज्वलंत मुद्दा के समाधान कइल जा सकत बा।

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