डीडीयू के गुरु गोरक्षनाथ शोधपीठ में बनी नाथ पंथ संग्रहालय

khabar Bhojpuri Desk

गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गुरु गोरक्षनाथ शोधपीठ में नाथ पंथ संग्रहालय बनी। इहां  पs नाथ पंथ से संबंधित पांडुलिपि आ दुर्लभ वस्तुअन के संरक्षित कइल जाई। एकरा खातिर विश्वविद्यालय प्रशासन प्रस्ताव तइयार कs लेले बा। जल्दिये एकरा के शासन के भेजल जाई।

योजना के मोताबिक, नाथ पंथ संग्रहालय के महाराणा प्रताप परिसर इस्थित शोधपीठ के द्वितीय तल पs बनावल जाई। एकरा पs करीब दु करोड़ रुपिया खर्च होई। जल्दिये एकर प्रेजेंटेशन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सोझा कइल जाई। एकरा बाद शासन के लगे भेजल जाई।

गुरु गोरक्षनाथ शोधपीठ में नाथ पंथ पs शोध कार्य हो रहल बा। गोरखनाथ मंदिर दर्शन खातिर श्रद्धालु पूरा देसभर से आवेला लो। पिछिला कुछ समय में एकरा संख्या में बहुते इजाफा भइल बा। एमे बहुत सारा लोगन के नाथ संप्रदाय के इतिहास के बारे में जाने आ समझे के इच्छा होला। एह लोगन के आसानी से ई जानकारी उपलब्ध होखे, एकरा ख्याति विश्वविद्यालय के ओर से नाथ पंथ संग्रहालय बनावे के योजना बनावल गइल बा।

संग्रहालय में होई नाथ पंथ पs डॉक्यूमेंटरी के प्रदर्शन

संग्रहालय में नाथ पंथ पs भइल पुरान कामन के बारे में जानकारी मिली। एमे नाथ पंथ पs भइल शोध आ किताब मवजूद रही। एकरा संगही नाथ योगियन के वेशभूषा, एकरा से जुड़ल पांडुलिपियन के रखल जाई। संग्रहालय आवे वाला लोगन के नाथ पंथ के इतिहास बतावे खातिर एगो डॉक्यूमेंटरियो देखावल जाई।

शोधपीठ में बा नाथ पंथ लाइब्रेरी

गोरक्षनाथ शोधपीठ में पहिला तल्ला पs एगो लाइब्रेरी बा, जेमे नाथ पंथ से जुड़ल दु हजार से जादे किताब बा। एमे विद्यार्थियन आ शोधार्थियन के अलावे आम लोग जाके नाथ पंथ के बारे में जानकारी प्राप्त कs सकत बा। शोधपीठ के उप निदेशक डॉ. कुशल नाथ मिश्र बतवलें कि लाइब्रेरी में अंग्रेजी आ हिंदी दुनो भाषा के नाथ पंथ से संबंधित लगभग 2000 से जादे किताब बा। संग्रहालय बन गइला से ई एगो अइसन केंद्र बन जाई, जहवां नाथ पंथ से जुड़ल सब जानकारी उपलब्ध होई।

कुलपति प्रो. पूनम टंडन कहली कि गोरखपुर के पहचान गोरक्षनाथ मंदिर आ नाथ पंथ से बा। शोधपीठ के नाथ पंथ के एगो जीवंत केंद्र के रूप में विकसित करे के बा। प्रस्तावित संग्रहालय में नाथ पंथ से संबंधित समूचा पांडुलिपि, चित्र, नाथ योगियन के वेशभूषा, दुर्लभ प्राचीन वस्तुअन के उपलब्ध सामग्रियन के संग्रह होई।

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