नई दिल्ली : भोजपुरी भाषा के भारतीय संविधान के आठवीं अनुसूची में सामिल करावे खातिर मातृभाषा दिवस पs सुक के भोजपुरी जन जागरण अभियान के ओर से एक दिन के धरना प्रदर्शन जंतर मंतर पs भइल। एकर नेतृत्व डॉ. संतोष पटेल के ओर से कइल गइल।
मालूम होखे कि भोजपुरी भाषा सोलह देसन में लगभग 25 करोड़ लोगन द्वारा बोलल जाये वाली भाषा हियs। एह भाषा के मारीशस आ नेपाल में संवैधानिक मान्यता प्राप्त बा। सुक के धरना को भोजपुरी गायिका कल्पना पटवारी आ भोजपुरी अभिनेत्री शारदा सिंह अपना उपस्थिति से आंदोलन के गौरव प्रदान कइलें। कल्पना पटवारी कहली कि हम एह आंदोलन के संगे पहिलहूं रहनी आ आजो एकरा समर्थन में बानी। सरकार जवना तरे भाषा डोगरी के भा आउर भाषा के मान्यता प्रदान कइले बिया आ ओहि तरे एतना सारा देसन में बोलल जाए वाली भाषा भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता प्रदान करे।

ओहिजा, अभिनेत्री शारदा सिंह कहलें कि भोजपुरी सिनेमा में काम करत भोजपुरी से बहुते प्रेम बा आ एकरा मान्यता खातिर आयोजित एह धरना के समर्थन में इहां आइल बानी। सरकार के भोजपुरी के मान्यता प्रदान करे के चाहीं।
अध्यक्षता कs रहल डॉ.संतोष पटेल कहलें कि भोजपुरी भाषा के अभी ले मान्यता मिल जाये के चाहत रहे, बाकिर भोजपुरी लगातार राजनीति के शिकार होत आ रहल बिया। ई भाषा बहुते पुरान भाषा हियs। कुछ लोग एकरा के हिंदी के बोली बता के संविधान में नइखे आवे देहल चाहत। ओहिजा डॉ. संतोष पटेल कहलें कि हमनी के लगातार 6 अगस्त, 2015 से संसद के प्रत्येक सत्र में धरना कs के सरकार के गृह मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय से मांग करत आ रहल बानी बा। एकरा बादो सरकार हमनी पच्चीस करोड़ भोजपुरियन के भावना के नइखे समझ रहल। हमनी के उम्मीद बा कि ई सरकार भोजपुरी के जल्दिये मान्यता दी l

ओहिजा संस्था के महासचिव मुखदेव बैठा कहलें कि हमनी के आंदोलन तब तक चलत रही, जब तक कि सरकार हमनी के बात नइखे मान लेत। हमनी के लगातार संघर्ष करत रहेम सs। संस्था के उपाध्यक्ष सीके भट्ट कहलें कि अभी हमनी के शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन कs रहल बानी सs। जदि सरकार हमनी के बात नइखे मानत तs हमनी के सड़क पs उतरेम सs आ जरूरत पड़ल तs लाखन भोजपुरियन के संगे संसद के घेराव करेम सs।
ओहिजा, महासचिव डॉ. पुष्कर कहलें कि भोजपुरी के सामाजिक मान्यता तs बहुत पहिलही मिल चुकल बा, बाकिर खेद के बात बा कि अभी ले ई संवैधानिक मान्यता खातिर तरस रहल बिया।
एह धरना मे मुख्य रूप से डॉ. संतोष पटेल, पुष्कर कुमार, सीके भट्ट, रजनीश झा, शारदा सिंह, कल्पना पटवारी, संतोष यादव, गौतम सिंह बिहारी, धनंजय सिंह, रामेश्वर महतो कुशवाहा, मुखदेव बैठा, रितेश राणा, नागेंद्र पटेल, रंजीत कुमार, राष्ट्रीय सलाहकार प्रमोद कुमार सुमन, आउर मिट्टी फाउंडेशन से चंदन कुमार के अलावे बड़ संख्या में भोजपुरी भाषी उपस्थित रहल लो।
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