कीटनाशक के बढ़त इस्तेमाल से बच्चा मनोरोगी में बदल सकता। एम्स के विशेषज्ञ खेती में इस्तेमाल होखे वाला कीटनाशक के दुष्प्रभाव प शोध करतारे। एम्स के चाइल्ड न्यूरोलॉजी प्रभाग के संकाय प्रभारी प्रोफेसर डॉ. शैलाफी गुलाटी एकरा बारे में जानकारी देले।
खेती में इस्तेमाल होखे वाला कीटनाशक छोट बच्चा के मनोरोगी में बदल सकेला। विशेषज्ञ आशंका जतवले बाड़न कि आनुवंशिकी आ एपिजेनेटिक्स के अलावा पर्यावरण में बदलाव लइकन में ऑटिज्म के एगो प्रमुख कारक हो सकेला। एकर गंभीरता के पता लगावे खातिर एम्स के विशेषज्ञ दिल्ली के आसपास हरियाणा क्षेत्र में शोध शुरू क देले बाड़े। एह शोध के दौरान लौकी आ बाकी सब्जी के खेती के दौरान इस्तेमाल होखेवाला कीटनाशक के असर तीन महीना तक के बच्चा प देखाई दिही। अध्ययन में पता चल जाई कि एकरा चलते बच्चा में ऑटिज्म के बेमारी बढ़ता कि ना।
एम्स के चाइल्ड न्यूरोलॉजी डिवीजन के प्रभारी संकाय प्रोफेसर डॉ. शैलाफी गुलाटी के कहनाम बा कि आनुवंशिक कारण से ए बेमारी के लक्षण बच्चा में देखाई देवेला। एकरा अलावा पर्यावरण के भी एगो कारक मानल जा सकेला। प्रदूषण के अलावा एह में कीटनाशक के इस्तेमाल भी शामिल बा। शुरुआती अनुमान से पता चलत बा कि कीटनाशक के रस के एगो कारक मानल जा रहल बा। एकरे साथ ही एपिजेनेटिक कारण आ महतारी के दिहल दवाई समेत अउरी कारक भी ऑटिज्म खातिर जिम्मेदार हो सके लें। हालांकि ऑटिज्म के कारण अभी भी रहस्य बनल बा। कवनो जांच के माध्यम से एकर पुष्टि संभव नइखे। विशेषज्ञ एकर पुष्टि क्लिनिक टेस्ट के माध्यम से ही क सकतारे।
17 साल में समस्या दुगुना हो गइल
17 साल में ऑटिज्म के समस्या लगभग दुगुना हो गइल बा। आंकड़ा के मुताबिक साल 2006 में हर 66 बच्चा में से एक बच्चा के ए बेमारी से पीड़ित पावल गइल। साल 2023 में इ आंकड़ा बढ़ के हर 36 में से एक बच्चा हो गइल बा। एम्स साल 2011 में एगो अध्ययन कइले रहे। ओह घरी हर 89 में से एगो बच्चा एकरा से पीड़ित पावल गइल रहे । विशेषज्ञ के मुताबिक समय के संगे बच्चा में इ समस्या बढ़ता। ई चिंता के विषय बा ।