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अखिल भारतीय साहित्य परिषद, मिर्जापुर में कइल गइल काव्य गोष्ठी के आयोजन

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गंगा तट पर बसा हुआ मेरा विंध्याचल धाम है- राजेश राज

आओ मिलकर देश बनाएँ और तिरंगा लहराएँ- भोलानाथ कुशवाहा।

अखिल भारतीय साहित्य परिषद, मिर्जापुर के तत्वावधान में मिलन आवास, अंगढ़ में मासिक गोष्ठी के आयोजन कइल गइल। एह सेमिनार में मुख्य अतिथि गोरखपुर के मशहूर आशु संचालक आ कवि राजेश राज रहले. राजेश राज के अपना गृह जिला मिर्जापुर में अइला पर उनुका सम्मान में एह कविता गोष्ठी के आयोजन कइल गइल.

मालूम बा कि राजेश राज फिलहाल गोरखपुर में रहत बाड़े अवुरी उनुकर नाम देश के बड़का आशु संचालक में गिनल जाला। राज जी भारत सरकार के कई गो रेडियो सीरियल आ कई गो योजना के टाइटल सांग लिखले बानी। गोष्ठी के अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार भोलानाथ कुशवाहा कइलन. कार्यक्रम के संचालन अरविंद अवस्थी कईले।

कार्यक्रम के शुरुआत में आनंद अमित मुख्य अतिथि आ उपस्थित कवि लोग के स्वागत कइलन. गोष्ठी के शुरुआत अरविंद अवस्थी माता सरस्वती के आराधना से कईले। मुख्य अतिथि राजेश राज पढ़ले – कुछ भी कर सकने में सक्षम जिसका पावन नाम है। गंगा तट पर बसा हुआ मेरा विंध्याचल धाम है। अध्यक्षता करत भोलानाथ कुशवाहा पढ़ले- आओ मिलकर देश बनाएं और तिरंगा लहरायें। सभी धर्म की अच्छी बातें सीखें और सिखाएं। काव्य पाठ के क्रम में वरिष्ठ कवि केदारनाथ सविता  सुनवले- शिल्पकार पत्थर में इंसान जगाने के लिए चोट करता रहा। यहाँ इंसान इंसान की चोट से पत्थर होता रहा। अरविंद अवस्थी पढ़लें- एक उम्मीद के सहारे जिये जाता हूँ। कभी तो तेल निकल आये किसी घानी में। आनंद अमित सुनवले- पहले जुबाँ को तोलिये मेरी तरह। फिर आप भी कुछ बोलिये मेरी तरह

अंत में अखिल भारतीय साहित्य परिषद मिर्जापुर के अध्यक्ष राजपति ओझा सभे कवि लोग के धन्यवाद देत घोषणा कइलन कि भविष्य में हर महीना के अंतिम अतवार के संस्था के मासिक कविता गोष्ठी जारी रही। मुख्य अतिथि के स्वागत करे खातिर राजापति ओझा भी कविता पाठ कइलन।

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