उत्तर प्रदेश के देवरिया जिला मुख्यालय से लगभग 23 किलोमीटर दूर स्थित रुद्रपुर उपनगर उपकाशी के नाम से मशहूर बा। इहां के बाबा दुग्धेश्वर नाथ मंदिर के इतिहास पुरान बा। हर चार साल पs होखे वाला अधिक मास पs एह धार्मिक स्थल के खास महत्व बा। नीसक पत्थर से बनल शिवलिंग के महाकालेश्वर उज्जैन के उपज्योतिर्लिंग मानल जाला। मानल जाला कि शिवलिंग के स्पर्श से ही परेशानी दूर हो जाला।
मानल जाला कि रुद्रपुर के स्थापना राजा वशिष्ठसेन कइले रहलें। रुद्रपुर में अंग्रेजन के खिलाफ लड़ाई के दौरान साल 1857 में सतासी राज के गौरवशाली स्मृति बा। इहो मानल जाला कि देवाधिदेव भगवान शिव के नाम से जानल जाए वाला पवित्र नगर रुद्रपुर के लगे स्थित सभ गाँव के नाम भगवान शिव के नाम पs रखल गइल बा। ई इलाका भगवान शिव के महिमा से प्रभावित भइल बा।
महाशिवरात्रि में भक्तन के भारी भीड़ बा
रुद्रपुर के आसपास के कई गो गाँव भगवान शिव के नाम से जानल जालें। जइसे रुद्रपुर, गौरी, बैतालपुर, अधरंगी, धतुरा, बौड़ी गाँव ह। इलाका सावन के महीना में शिवमय हो जाला आ भक्त लोग अपना मनोकामना खातिर जलाभिषेक करेला। फाल्गुन महीना में महाशिवरात्रि के दिन जलाभिषेक करे खातिर भारी संख्या में श्रद्धालु आवेले। एह जगह के दधिचि आ गर्ग ऋषि लोग के निवास मानल जाला।
भगवान शिव के बारे में पद्मपुराण में लिखल बा कि महाकालस्य यल्लिंगम दुग्धेशमिति विश्रुतम। धार्मिक ग्रंथन में दू तरह के शिवलिंग के विचार कइल गइल बा। वाणलिंग आ चंडलिंग के नाम बा। दुग्धेश्वरनाथ अनादि स्वयं भू चंडलिंग ह। सप्तकोसी इलाका में अउरी 11 गो शिवलिंग बाड़ें।
बाबा दुग्धेश्वरनाथ के महाकालेश्वर के दादश ज्योर्तिलिंगन के उपलिंग कहल जाला। दादश उपलिंग के स्थापना के बाद उपज्योतिर्लिंग के स्थापना भइल। इनमें से रुद्रपुर के बाबादुग्धेश्वर नाथ के पहिला प्रतिष्ठान मानल जाला।