लखनऊ में बियाह के दिन मंगेतर दुल्हिन के बोला के गर्दन रेत के हत्या क देले। लाश के कुकरैल जंगल में दफना दिहलस। पुलिस लईकी के निशानदेही पे कुकरैल जंगल से बरामद क लेलस।
पुराना महानगर घोसियाना इलाका के निवासी संजय कुमार कश्यप के 22 साल के बेटी कोमल कश्यप के बियाह 4 मई के राहुल नाम के इलेक्ट्रीशियन से होखे वाला रहे। राहुल मूल रूप से रायबरेली के रहे वाला हवे अवुरी फिलहाल कुर्सी रोड पे किराया के मकान में रहेले।
4 मई के सांझ के संजय महानगर थाना में कोमल के लापता होखे के रिपोर्ट दर्ज करवले। पुलिस कुछ संदिग्ध से पूछताछ कईलस। एकरा में राहुल भी शामिल रहले। सोमवार के रात उनुका के पुलिस हिरासत में ले लेलस। कड़ा पूछताछ के बाद मंगलवार के रात करीब आठ बजे मुंह खोल के पूरा घटना के स्वीकार क लेले। आरोपी के गिरफ्तार क लिहल गईल बा।
पुलिस पूछताछ में राहुल बतवले कि उनुकर कोमल से तीन साल से प्रेम संबंध रहे। जब उ अपना परिवार के ए बारे में बतवले त उ लोग बियाह खातीर तैयार ना रहले। दोसरा तरफ कोमल ओकरा पे बियाह करावे के दबाव बनावत रहे। एकरा चलते उ हत्या क देले। अब पुलिस ए सनसनीखेज हत्या के मामला में आरोपी के परिवार के लोग के भूमिका के भी जांच करतिया।
गला रेत के हत्या
पुलिस के जांच में पाता चलल कि बियाह के दिन, सुबह करीब 8.30 बजे राहुल कोमल से मिले खातीर फोन कईले रहले। परिवार के लोग के ब्यूटी पार्लर जाए के कहला के बाद कोमल चल गईल रहली। राहुल ओकरा के बाइक से लेके कुकरैल के जंगल में पहुंच गईले, जहां पहिले दुनो लोग के मुलाकात होखत रहे। राहुल बतवले कि बातचीत के दौरान उ अचानक कोमल के अपना हाथ से गला रेत के हत्या क देले।
घटना के समय राहुल मोबाइल बंद क देले रहले ताकि उनुका पे निगरानी में ना पकड़ल जा सके। अपराध कईला के बाद उ घर में ही रहले, ताकि कवनो शक ना रहे, लेकिन पुलिस जब उनुका अवुरी कोमल के मोबाइल नंबर के लोकेशन अवुरी कॉल के डिटेल निकाललस त पाता चलल कि ओ दिन सबेरे जब कोमल घर से निकलल त राहुल के कुछ समय पहिले उनकर फोन आइल रहे।
उ घर के नजदीक से कोमल के रिसीव कईले रहले। दुनु के लोकेशन एके जइसन रहे। एहिजा से ओकरा पे शंका अउरी गहिराह हो गइल। पुलिस जब ओकरा पे कड़ा कार्रवाई कईलस त पहिले उ पुलिस के गुमराह कईले, लेकिन अंत में उ सच्चाई के खुलासा क देले।
हल्दी आ मेहंदी के संस्कार भी हो चुकल रहे, लेकिन राहुल के कहनाम बा कि चूंकि परिवार के लोग खुश ना रहले एहसे उनुका सोझा दुविधा रहे। कुछ दिन पहिले उ कोमल के मारे के साजिश रच के बियाह के दिन कोमल के हत्या क देले।
कोमल के माता-पिता के विश्वास ना होत रहे कि जवना आदमी से उनुकर बेटी के बियाह होखे के रहे, उहे आदमी के हत्या क देलस। उ रोवत-रोवत कहत रहले कि बियाह ना करे के चाहत रहले त अयीसन ना कईले रहते, लेकिन उनुका के जिए देले रहते। पिता संजय के जब पुलिसकर्मी से बेटी के हत्या के खबर मिलल त उ रोवे लगले।
रोवत-रोवत उ बतवले कि बेटी के पालन-पोषण बहुत गर्व से भईल बा। उनुका बियाह से पूरा परिवार खुश रहे। सगरी तइयारी हो गइल। कार्ड के बट गईल रहे। बियाह के हॉल बुक हो गईल रहे। चाहत रहे कि बेटी के डोली उनका कान्ह पे उठ जाव बाकिर होनी के कुछ अउर स्वीकार्य रहे। अब बेटी के डोली के जगह ओकर बूढ़ बाबूजी के ओकर अर्थी उठावे के पड़ी।
साभार- अमर उजाला