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Special story : ईंहों के जानी , ईंहों के पहचानी: ‘ “द रोशनी” के संस्थापक दीप्ति मिश्रा

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खबर भोजपुरी रउरा सभे के सोझा एगो सेगमेंट लेके आइल बा…. जवना में रउरा सभे के हर शुक के एगो नहवा से परिचय करावल जाला जे अपना क्षेत्र में शानदार काम कर रहल बाड़े/बाड़ी ।

एह कड़ी में आजू आईं जानल जाव कलाकृति के क्षेत्र में बेहतरीन काम कs रहsल ‘दीप्ति मिश्रा’ के बारे में…

गोरखपुर में जनमल दीप्ति मिश्रा सुरुआती पढ़ाई- लिखाई एहीजे भइल। बचपने से कला से बहुत प्यार रहे। भारतीय भोजपुरिया मिडिल क्लास फैमिली के ऊहे लकीर के फकीर वाली बात , कि जवना पढ़ाई के फैशन बन गइल बा उहे पढ़s ।घर के दबाव में आई के उहे राहि पs चले के परsल , जिनिगी इनका के ओइजा ले जात रहे जहाँ पे कला के दूर-दूर ले वास्ता ना रहें। बाकिर कहल जाला कि जवन मन में कवनो काम के करे के साध आ लगन रही तs रउरा के उs काम करे से भगवानो नईखन रोक सकत आ दीप्ति भोजपुरिया माटी के रहली तs हार कइसे मान जईती आ उ जिनगी के हर दुआर पs कुछ ना कुछ कलाकृति उकेर अईली।

 

कुछ समय पहिले इंजीनियरिंग के लहर चलत रहे, हर घर के कुछ लइका-लइकी इंजीनियरिंग करत लउकत रहले। एहि लहर में दीप्ति के भाई-बहिन भी इंजीनियरिंग करत रहले। ईs घर में सबसे छोट होखला के नाते तय रहे कि इंजीनियरिंग इनकर भविष्य बा। बाकीर दीप्ति इs समझ गईल रहली कि इरादा मजबूत बा अवुरी कठिनाई पैदा होइ।

2018 कॉलेज के शुरुआती दिन में सोशल मीडिया प्लेटफार्म फेसबुक पs ” रोशनी” नाव के पेज बनsवली। सोशल मीडिया के माध्यम से बहुत परेसानी भईल रहे।उनका बहुत दिक्कत के सामना करे के पड़ल लेकिन पहिला दिन से ही मालूम रहे कि “हिम्मत, हौसला अवुरी हुनर ​​से जीत हासिल करिहें”। लइकिन से जुड़ल आ ओह लोग के कलात्मक दृष्टिकोण बढ़ावे खातिर ” दs रोशनी”के एगो एनजीओ के रूप शुरुआत भईल ,आ कई बेर आर्थिक रूप से भी परेसानी ऊठावें के पड़ल बुझाइल कि आर्थिक रूप से मजबूत बने के पड़ी। एह से उ पोर्टेट, हस्तनिर्मित गहना, कई तरह हाथ से बनsल शानदार चीजन के बना के आर्थिक रूप से मजबूत बने के कोसीस करे लगली। पिछला 5 साल में दीप्ति 1000 से अधिका हाइपर रियलिस्टिक पोर्ट्रेट बनवले बाड़ी जवना में इंसान के चेहरा हूबहू लउकेला।

फेसबुक पs “The Roshni” के डेढ़ लाख के आसपास फॉलोअर बाड़े आ दीप्ति आपन काम के बदौलत एगो नया पहिचान बना रहsल बाड़ी।

मार्जिन ₹ 10 होखे भा शून्य, नतीजा बा कि आज उनका लगे कला के हर विधा में 50 से अधिका श्रेणी के कालकृति बा।

 

 

 

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