काशी हिंदू विश्वविद्यालय विज्ञान संस्थान के बीएचयू -एनईएसटी इंक्यूबेशन के विज्ञानी लोग मुट्ठी भर के एगो अइसन डिवाइस तइयार कइले बा लो जवन महज आधा घंटा में कोरोना के आरटीपीसीआर रिपोर्ट आ टीबी के रिपोर्ट दे दी।
ई डिवाइस एक बेर फेर तेजी से फइल रहल कोविड महामारी के नया वैरिएंट के प्रसार काल में आ प्रधानमंत्री के टीबी मुक्त भारत अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकत बा। महामारी के दौर में ई लैब्स के भार के तs कम करबे करी, पोर्टेबल होखला के नाते कहियो, कबहूं प्रयोग कइल जा सकत बा। एकरा के जांच के खर्चो मात्र 100 रुपिया भा बाद में आउर कम आई।
मोबाइल के आधा साइज के ई डिवाइस पांच सेंटीमीटर ऊंच, चार सेंटीमीटर चौड़ा आ वजन में 100 ग्राम से कम बा। एकरा खातिर कवनो बीएसएल मानक लैब्स के जरूरतो नइखे, ई खुद में 10-15 उपकरणन के समूह बा।
कोरिया के सहजोग से तइयार भइल उपकरण, दु महीना बाद होई लांच
आण्विक जीव विज्ञानी डा. यशवंत, अपना शोध छात्र कोरिया के सहजोग से एह डिवाइस के तइयार कइले बाड़ें। बीएचयू नेस्ट इन्क्यूबेशन के स्टार्टअप के प्रमुख आ विज्ञानी डा. शेखर आनंद बतवलें कि अब बेमारियन के टेस्टिंग के लेके समूचा देस के परिदृश्य बदल जाई। एसे कोविड के संगही टीबीयो के टेस्टिंग कइल जा सकत बा। फिलहाल, लगभग दु महीना तक एकर ट्रायल होई। एकरा बाडदे लांच कइल जाई।
मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक पs बा आधारित
स्वदेसी तकनीक से बनल ई मशीन मालिक्यूलर डायग्नोस्टिक पs आधारित बा। ई पालिमर चेन रिएक्शन माने पीसीआर आ लूप मेडिएटेड आइसोथर्मल एंप्लीफिकेशन माने लैंप मेथड के बीच के तकनीक हs। एकरा के पेटेंट करावल जा रहल बा, एहिसे एह पs जादे बात नइखे कइल जा सकत।