अपना से अपनही के समझावल कला हऽ- अवनीश त्रिपाठी

Sonu Kishor
Poetry Bhojpuri

जज्बात के शब्दन में देखावल कला ह।

अपना से अपनही के समझावल कला ह।।

 

रुसे के त बिना बात रिसिया जाला लोग।

खिसियाइल के जल्दी मनावल कला ह।।

 

दुःख सुख जीवन में कुल मिलत रही।

खाके धोखा जिनगी चलावल कला ह।।

 

काम परला पर आपन चिन्हा जाई।

फरहर बन के सबके अजमावल कला ह।।

 

निक भा बाउर अवनीश लिखबे करी।

सोच समझ के ताली बजावल कला ह।।

 

अवनीश त्रिपाठी ( गोपालगंज)

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एगो भोजपुरिया कलाकार, लेखक, कवि आ भोजपुरी खातिर समर्पित नवहा जे अपना माई भाखा खातिर हमेसा खाड़ रहेला। खेल आ राजनीति के खबर पढ़े खातिर हमरा से जुड़ीं खबर भोजपुरी पs। हमरा से रउआ सभे sonuyadav957670@gmail.com पs जुड़ल रहीं...