गोरखपुर: पूरबी के जनक, भोजपुरी गीत-संगीत के बुलंदियन तक पहुंचावे वाला अमर स्वतंत्रता सेनानी महेंदर मिसिर के जयंती पs भोजपुरी साहित्य के संवर्धन आ विकास खातिर प्रतिबद्ध संस्था “यायावरी वाया भोजपुरी” द्वारा एगो विचार गोष्ठी के आयोजन कइल गइल।
विचार गोष्ठी के सुरुआत में संस्था के मुख्य ट्रस्टी श्री बृजेश्वर मणि त्रिपाठी जी महेंदर मिसिर के भोजपुरी समाज के गौरव बतवनी। उहां के कहनी एक ओरि जहां महेंदर मिसिर भोजपुरी साहित्य खातिर आपन अजगुत योगदान देनीं आ गीत- संगीत के एगो अलग आयाम देनीं ओहिजा दोसरका तरफ भारत के स्वंत्रता संग्राम में जाली नोट के मशीन लगा के क्रांतिकारियन के मदद पहुंचवनी आउर खुद गिरफ्तार भइनी। ई उहां के देस आ समाज के प्रति समर्पण के बतावत बा।
महेंदर मिसिर जी के जिनगी के ऊपर लिखल गइल उपन्यास “महेंदर मिसिर” पs अंजोर डालत सुधीर मिश्र कहलें कि जदि रउआ मिसिर जी के निचिका से जानल आ बुझल चाहत बानी तs भोजपुरी के पहिला उपन्यासकार रामनाथ पांडेय जी द्वारा लिखल एह उपन्यास के जरूर पढ़े के चाहीं। एह किताब के पढ़ के एगो आम आदमी मिसिर जी के देस आ समाज के प्रति समर्पण के जान आ बुझ सकत बा। एकरा संगही आपन भोजपुरी साहित्य के एह महान रचनाकार से परिचित हो सकत बा। बता दीं कि बहुते जल्दी रउआ सभे एह उपन्यास के ऑडियो वर्जन में यायावरी वाया भोजपुरी एप पs सुन सकेम।
महेंदर मिसिर जी द्वारा रचित गीतन के शिवांगी पाठक “जूही” सुना के उपस्थित लोगन के मन मोह लेली। एह मवका पs विमलवाती त्रिपाठी, अनुराग रंजन आ मिनी उपाध्याय के उपस्थिति रहल।