बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ राम कुमार जायसवाल बतवलें कि काला मोतियाबिंद बेहद खतरनाक बीमारी ह। एह बीमारी में मरीजन के कौनो लक्षण दिखाई नाइ देता। इहे वजह बा कि एह बीमारी में मरीजन के आंख के रोशनी चल जाला।
काला मोतियाबिंद में आंखन के नस (ऑप्टिक नर्व) पर दबाव पड़sला एहसे उनके काफी नुकसान पहुंचsला। लगातार दबाव पड़ले से नर्व ले ब्लड के सप्लाई नाइ पहुंचsला, एहसे नर्व नष्ट हो जाला। एही ऑप्टिक नर्व के जरिए सूचना अउर चित्र दिमाग ले पहुंचsला। अगर ऑप्टिक नर्व अउर आंखन के अन्य भाग पर पड़े वाले दबाव के कम न कइल जाव, त आंख के रोशनी चल जाले।
पांच तरह के होला काला मोतियाबिंद
डॉ राम कुमार जायसवाल बतवलें कि काला मोतियाबिंद पांच तरह के होला। पहिला प्राथमिक चाहे ओपन एंगल ग्लूकोमा, एंगल क्लोजन ग्लूकोमा, लो टेंशन चाहे नार्मल टेंशन ग्लूकोमा, कोनजेनाइटल ग्लूकोमा अउर सेकेंडरी ग्लूकोमा होला। बतवलें कि पूर्वांचल में सबसे बेसी मरीज ओपन एंगल ग्लूकोमा के मिलेने। हर महीना 25 से 30 मरीज काला मोतियाबिंद के इलाज खातिर आ रहल बानें। एहमें पांच फीसदी मरीजन के आंख के रोशनी भी चल जा रहल बा।
काला मोतियाबिंद के लक्षण
डॉ. राम कुमार जायसवाल बतवलें कि आमतौर पर काला मोतियाबिंद के कौनो विशेष लक्षण नाइ होला। इहे वजह ह कि लोग के एह बीमारी के पता समय से नाइ चल पावला। इलाज में देरी के वजह से मरीजन के आंख के रोशनी चल जाला। आंख अउर सिर में तेज दर्द होखल। नजर कमजोर होखल चाहे धुंधराह लउकल। आंख लाल होखल। रोशनी के चारों ओर रंगीन छल्ला लउकल। जी मचलाइल अउर उल्टी होखल जइसन लक्षण मिलsला।
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