Suprem Cort: वरिष्ठ नागरिकन के SC से झटका, रेलवे किराया में रियायतन के बहाली वाली याचिका खारिज

Anurag Ranjan

सुप्रीम कोर्ट से सुक के वरिष्ठ नागरिकन के उम्मीदन के झटका लागल। शीर्ष अदालत ओह याचिका के खारिज कs देलस जेमे रेलवे द्वारा कोविड महामारी से पहिले वरिष्ठ नागरिकन के दिहल जाये वाला ट्रेन किराया में रियायत के बहाली के मांग कइल गइल रहे। अदालत के कहनाम बा कि चूंकि ई शासकीय नीति के ममिला बा एहिसे अदालत खातिर सरकार के निरदेस जारी कइल उचित ना होई।

जस्टिस एसके कौल आ जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह के पीठ एमके बालाकृष्णन द्वारा दायर याचिका पs सुनवाई करत रहे। याचिका में कोरोना के प्रसार के रोके खातिर बंद कइल गइल रियायतन के बहाली के मांग कइल गइल रहे। पीठ कहलस कि संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत एगो याचिका में परमादेश (Mandamus) रिट जारी कइल एह अदालत खातिर उचित ना होई। सरकार के वरिष्ठ नागरिकन के जरूरतन आ राजकोषीय नतीजन के धेयान में राखत एह मुद्दा पs फैसला करे के बा। एहसे याचिका खारिज कइल जात बा। पीठ याचिकाकर्ता के तर्क के खारिज करत कहलस कि वरिष्ठ नागरिकन के रियायत देहल सरकार के दायित्व हs।

केंद्र 2020 में कोविड-19 के प्रसार के रोके खातिर लोगन के आवाजाही के कम करे ला वरिष्ठ नागरिकन के दिहल जाये वाला रियायतन के बंद कs देले रहे। एगो संसदीय स्थायी समिति हाले में महामारी के सुरुआत से पहिले वरिष्ठ नागरिकन के दिहल गइल रियायतन के फेर से सुरू करे के सिफारिश कइले रहे। भारतीय रेलवे कोरोना महामारी से पहिले 60 साल भा ओसे जादे उमिर के पुरुषन के किराया में 40 प्रतिशत के छूट आ 58 साल से जादे उमिर के महिला लोगन के 50 प्रतिशत के छूट प्रदान करत रहे।

Share This Article
Content Creator
Follow:
सिविल इंजीनियर, भोजपुरिया, लेखक, ब्लॉगर आ कमेंटेटर। खेल के दुनिया से खास लगाव। परिचे- एगो निठाह समर्पित भोजपुरिया, जवन भोजपुरी के विकास ला लगातार प्रयासरत बा। खबर भोजपुरी के एह पोर्टल पs हमार कुछ खास लेख आ रचना रउआ सभे के पढ़े के मिली। रउआ सभे हमरा के आपन सुझाव anuragranjan1998@gmail.com पs मेल करीं।