मेरठ। मेरठ जिला में बैनामा में फर्जी आ पुरान स्टांप पेपर लगा के साल 2015 से 2023 के बीच करीब 14 करोड़ रुपिया के बड़ घोटाला सामने आइल बा। ई घोटाला दस्तावेज लेखक के रूप में काम करे वाला एगो वकील कइले रहे, जवन फिलहाल जेल में बंद बा।
ई घोटाला के ममिला सामने अइला के बाद संपत्ति किने वाला लोगन से अब वसूली कइल जा रहल बा। हालांकि, फर्जी स्टांप के इस्तेमाल पहिलहू भइल रहे, बाकिर कइयन गाे ममिलन में कार्रवाई के समय-सीमा पूरा हो गइला के चलते ओकरा पs कार्रवाई नइखे हो पावत।
वसूली नोटिस के खिलाफ 15 पीड़ित हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कइले रहे लोग। कोर्ट एह ममिला में संबंधित अधिकारियन के निरदेस देलस कि ऊ तीन महीना के भीतर सुनवाई करे के फैसला लेवे।
जांच में पता चलल बा कि साल 2020 से 2023 के बीच 999 बैनामा में करीब 7.50 करोड़ रुपिया के घोटाला भइल रहे, जवना में से अधिकतर ममिलन में वसूली हो चुकल बा। विधानसभा के प्राक्कलन समिति के आदेस पs 2015 से 2020 के बीच के बैनामा के स्टांप पेपर के जांच कइल गइल, जवना में 932 बैनामा में 6.39 करोड़ रुपिया के फर्जी स्टांप मिलल।
अब एह बैनामा के खरीदारन के नोटिस भेज के वसूली कइल जा रहल बा। जवन लोग फर्जी स्टांप के रकम जमा ना कइले बा, ओह लोग के खिलाफ सहायक महानिरीक्षक निबंधन, एडीएम वित्त आ जिलाधिकारी के कोर्ट में सुनवाई चलत रहे।
वसूली नोटिस पावे वाला 15 पीड़ित हाई कोर्ट में अलग-अलग याचिका दाखिल कइले रहे लोग। जस्टिस विवेक सरन के कोर्ट में सुनवाई के बाद आदेस दिहल गइल कि याचिकाकर्ता तीन हफ्ता के भीतर जिलाधिकारी आ संबंधित निबंधन अधिकारी के कोर्ट में आपन पक्ष रखस।
संगही कोर्ट संबंधित अधिकारियन के तीन महीना के भीतर फैसला लेवे के आदेस देलस। सब याचिकाकर्ता कोर्ट के आदेस मोताबिक आपन प्रत्यावेदन जमा कs चुकल बाड़ें।
तीन साल पहिले खुलल रहे स्टांप घोटाला
ई स्टांप घोटाला साल 2023 में उजागर भइल रहे। जांच के दौरान 2020 से 2023 तक के बैनामा के जांच भइल, जबकि विधानसभा के आदेस पs 2015 से 2020 तक के भौतिक स्टांप पेपर के सत्यापन कइल गइल। एआइजी निबंधन शर्मा नवीन कुमार एस बतवलें कि हाई कोर्ट के आदेस के अनुसार अब एह ममिला के गुण-दोष के आधार पs फैसला कइल जाई आ पीड़ितन के प्रत्यावेदन मिलल सुरू हो गइल बा।







