प्रयागराज। मन में उल्लास, दिल में आनंद आ देह में भक्ति के रस समाइल बा। कवनो लालच ना, कवनो सुविधा के चाह ना। बस अलौकिक सुख के खोज में भौतिक मोह-माया छोड़ के हजारन गृहस्थ तीर्थराज प्रयागराज में डेरा डलले बा लो। कड़ाका के ठंड के परवाह कइले बिना आधा रात के बाद तक लोग त्रिवेणी संगम तट पs पहुंचत रहल। हर-हर गंगे के जयकारा से पूरा इलाका गूंज उठल।
त्रिवेणी तट पs जप-तप, यज्ञ-अनुष्ठान के महापर्व माघ मेला सनिचर से पौष पूर्णिमा स्नान के संगे सुरू हो गइल। संत-महात्मा आ गृहस्थ संगम के पवित्र जल में डुबकी लगाके कल्पवास के संकल्प लिहें। संगम के रेती पs माघी पूर्णिमा तक लगातार जप-तप चलत रही। कइयन गो श्रद्धालु तs 15 फरवरी के महाशिवरात्रि तक भजन-कीर्तन आ पूजा-पाठ में लीन रही लोग।
ई बेर चतुर्ग्रहीय योग में माघ मेला के सुभारंभ हो रहल बा, जवन बहुत पुण्यकारी मानल जात बा। माघ महीना में संगम तट पs कल्पवास के परंपरा सदियन से चलत आ रहल बा। गृहस्थ लोग घर-परिवार, सुख-सुविधा छोड़ के पूरा महीना कठिन तपस्या करेला, ताकि जन्म-जन्मांतर के पाप से मुक्ति मिले आ पूर्वज लोग के तृप्ति आ मोक्ष के रास्ता खुले।
अबकि बेर पहिला बेर माघ मेला सात सेक्टर में बसावल गइल बा, जबकि पहिले पांच सेक्टर में मेला लागत रहे। ज्योतिर्विद आचार्य देवेंद्र प्रसाद त्रिपाठी बतवलें कि पूर्णिमा तिथि सुक के सांझ 6 बजके 12 मिनट से सुरू होके सनिचर शाम 4 बजके 3 मिनट तक रही। सनिचेर के सबेरे 10 बजके 3 मिनट तक ब्रह्म योग रहल, ओकरा बाद ऐंद्र योग लाग गइल। धनु राशि में सूर्य, मंगर, बुध आ सुक्र के एक संगे संचरण से चतुर्ग्रहीय योग बन रहल बा, जवन अत्यंत सुभ मानल जात बा।
16 स्नान घाट आ कड़ा सुरक्षा इंतजाम
श्रद्धालुअन के सुविधा खातिर संगम आ गंगा में 16 स्नान घाट बनावल गइल बा। घाटन पs रोशनी, कासा बिछावन आ सुरक्षा के पूरा इंतजाम बा। भीड़ नियंत्रण खातिर 42 अस्थायी पार्किंग बनावल गइल बा, जहंवा 1 लाख 30 हजार गाड़ी खड़ा हो सकेला।
मेला क्षेत्र में सुरक्षा खातिर 17 थाना, 42 पुलिस चौकी, 20 अग्निशमन स्टेशन, जल पुलिस थाना आ कंट्रोल रूम बनावल गइल बा। आठ किलोमीटर लमहर डीप वाटर बैरिकेडिंग लगावल गइल बा। 400 सीसीटीवी आ एआई युक्त कैमरा से भीड़ पs लगातार नजर राखल जा रहल बा, ताकि माघ मेला सुरक्षित आ बेवस्थित रहे।
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