भुवनेश्वर। पुरी जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार के सूचीकरण आ गिनती के प्रक्रिया बुध से फेर सुरू हो गइल बा। ई काम चरणबद्ध तरीका से चलावल जा रहल बा आ पहिला चरण के गिनती 11 अप्रिल तक जारी रही। एकरा बाद 13 से 18 अप्रिल के बीच दूसरका चरण के गिनती कइल जाई।
गिनती के दौरान श्रद्धालुअन खातिर मंदिर के गर्भगृह बंद रही। हालांकि, भक्तन के बाहरी कक्ष (जगमोहन) से भगवान के दर्शन के सुविधा मिलत रही, ताकि पूजा बेवस्था प्रभावित ना होई।
प्रशासन के अनुसार, एह चरण में बाहरी कक्ष में रखल रत्न भंडार के खजाना के गिनती कइल जा रहल बा। एमे सोना के आभूषण आ राजराजेश्वर के राजसी वेश सामिल बा। एह वस्तुअन के बहुते नाजुक होखला के कारण गिनती में जादे समय लाग रहल बा।
पूरा प्रक्रिया के होई वीडियोग्राफी
पारदर्शिता बना के रखे खातिर आधुनिक तकनीक के सहारा लिहल गइल बा। पूरा प्रक्रिया के 3डी मैपिंग, फोटोग्राफी आ वीडियोग्राफी करावज जा रहल बा, ताकि हर चरण के रिकॉर्ड सुरक्षित रहे। गिनती पूरा होखला के बाद गर्भगृह के पुनर्स्थापन के काम कइल जाई, जवना से भविष्य में सब बेवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके।
एने, जगन्नाथ मंदिर के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी बतवलें कि देवता खातिर तीन गो ‘रत्न पालंकियन’ के तइयार कइल गइल बा। वरिष्ठ सेवायतन के मार्गदर्शन में एकरा उपयोग के बेवस्था तय कइल गइल बा। पुरान पालंकियन के हाथी दांत से बनल हिस्सन के नया पालंकियन में सामिल कइल गइल बा।









