डीडीयू: भाषा के महत्व के बेवसायिक दृष्टि से समझला के जरूरत बा: प्रो० राजेश सिंह

Anurag Ranjan

गोरखपुर: ‘भाषा के महत्व के बेवसायिक दृष्टि से समझला के जरूरत बा। एसे कइयन गो संभवनन के केवाड़ी खुली।’ ई विचार दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिन्दी आ पत्रकारिता विभाग में विश्वविद्यालय केे नैक मूल्यांकन में ए प्लस प्लस के उपलब्धि प्राप्त होखला के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में कुलपति प्रो. राजेश सिंह व्यक्त कइलें। प्रो. सिंह कहलें कि गोरखपुर विश्वविद्यालय पूरा देस में पब्लिक सेक्टर के विश्वविद्यालयन में दूसरका स्थान पs आ गइल बा। एह उपलब्धि के बना के राखे खातिर विश्वविद्यालय के सब शिक्षकन के प्रयासरत रहे के चाहीं। कुलपति हिंदी विभाग के इतिहास आ उपलब्धियन के चरचा करत कहलें कि विश्वविद्यालय में 10 सेंटर ऑफ एक्सलेंस बनावे के योजना बा जेमें एगो हिंदी विभाग में स्थापित होई। ऊ प्रेमचंद पीठ के चरचा करत कहलें कि एकरा के पुनर्जीवित कइल जा चुका बा। ऊ कहलें कि गोरखपुर विश्वविद्यालय के सेटअप लखनऊ विश्वविद्यालय से बेहतर बा आ इहां के शिक्षकन आ छात्रन में अपार सम्भावना बा।

कार्यक्रम के संबोधित करत दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविधालय के कुलपति प्रो० राजेश सिंह

 

हिंदी विभाग के छात्रन के अलग-अलग देसन के दूतावासन से जोड़ल जाये के सलाह देत प्रोफेसर सिंह बतवलें कि हिंदी के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पs अपार संभावना बा काहेकि 165 देसन में हिंदी पढ़ावल जा रहल बा। विश्वविद्यालय के शिक्षकन के अकादमिक गतिविधियन में निरंतर संलग्न में रहे के आह्वान करत कुलपति कहलें कि विश्वविद्यालय में सीड मनी के रूप में पर्याप्त राशि उपलब्ध बा, जरूरत बा विश्वविद्यालय के शिक्षकन के शोध प्रस्ताव के। ऊ भाषा के क्षेत्र में श्रेष्ठ शोध खातिर पाँच लाख रुपिया के फेलोशिप के संगही हिन्दी विभाग के बाहर अधूरा पड़ल सभागार के पूरा करावे के घोषणा कइलें।

प्रसार भारती गोरखपुर के कार्यक्रम अधिकारी डॉ० ब्रजेंद्र नारायण। फोटो -खबर भोजपुरी

 

एकरा पहिले समारोह के मुख्य अतिथि प्रसार भारती गोरखपुर के कार्यक्रम अधिकारी आ विभाग के पूर्व छात्र डॉ. ब्रजेंद्र नारायण कहलें कि कुलपति विश्वविद्यालय के क्षमता के कुशलतापूर्वक दोहन कइलें। जवना से उनका नितृत्व में विश्वविद्यालय के ई उपलब्धि प्राप्त भइल। डॉ. ब्रजेंद्र विश्वविद्यालय में भोजपुरी अध्ययन केंद्र के स्थापना के सुझाव देत प्रसार भारती के ओर से विश्वविद्यालय में कार्यक्रम निर्माण के प्रस्ताव देलें।

कार्यक्रम में उपस्थित रहल हिन्दी विभाग के पूर्व आचार्य रामदरश राय कुलपति के प्रशंसा करत कहलें कि जवना तरे हर जंगल में चंदन ना होला ओहि प्रकार हर विश्वविद्यालय के अइसन कुलपति ना मिलेला।

विश्वविद्यालय के आइक्यूएसी के चेयरमैन प्रो. अजय सिंह बतवलें कि कुलपति के दृष्टि आ निरतेत्व के कारणे नैक मूल्यांकन में विश्वविद्यालय संख्यात्मक आ गुणात्मक दुनो मानदंडन पs खरा उतरत आज भारत के चउथा आ प्रदेश के पहिला नंबर के विश्वविद्यालय बन गइल बा। प्रो. अजय सिंह नैक के कार्यप्रणाली के चरचा करत बतवलें कि कुलपति विश्वविद्यालय में अभिलेखीकरण के दुरुस्त करवलें काहेकि नैक मूल्यांकन में अभिलेखीकरण सबसे जादे महत्वपूर्ण होला।

एकरा पहिले अपना स्वागत वक्तव्य में हिन्दी आ पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष प्रो. दीपक प्रकाश त्यागी कुलपति के निरतेत्व क्षमता के प्रशंसा करत कहलें कि आज उनका कारण विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय आ अंतरराष्ट्रीय स्तर पs एगो श्रेष्ठ संस्थान के रूप में जानल जा रहल बा आ एकरा प्रति उत्सुकता बढ़ल बा। प्रो. त्यागी बतवलें कि कुलपति विश्वविद्यालय के बेहतरी खातिर पहिलके दिन से प्रयासरत रहल बाड़ें।

कार्यक्रम के संचालन पत्रकारिता पाठ्यक्रम के समन्वयक प्रो. राजेश मल्ल कइलें। कार्यक्रम में एमए के छात्रा लोग गोरखनाथ आ कबीर के पदन के गायनो कइल लोग।

समारोह में विभाग के सब शिक्षकन सहित संस्कृत विभाग के शिक्षकगण आ सेंट एण्ड्रूज कॉलेज के प्रो. प्रभा सिंह आ विभाग के छात्र-छात्रा लोगन के उपस्थिति रहल।

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