Gorakhpur News: बिना प्राचार्य संचालित हो रहल बा गोरखपुर विश्वविद्यालय के 150 महाविद्यालय, इ बा बड़ वजह

Minee Upadhyay

गोरखपुर : दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से जुड़ल 319 कॉलेज चल रहल बाड़े, लेकिन ए कॉलेज में से आधा कॉलेज यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) में पंजीकृत नईखे। एकर सबसे बड़ कारण बा कि ए कॉलेज के संगे स्थायी प्रिंसिपल के ना होखल। करीब डेढ़ सौ कॉलेज कॉलेज प्रबंधन के ओर से पदाधिकारी प्रधानाध्यापक के मदद से चलावल जाता। कॉलेज प्रबंधन के सामने सबसे बड़ समस्या स्थायी संबद्धता के बा।

बिना स्थायी प्रिंसिपल के विश्वविद्यालय से स्थायी संबद्धता लेबे के कवनो प्रावधान नइखे। अयीसना में कॉलेज प्रबंधन प्रधानाध्यापक के अनुपस्थिति के चलते स्थायी संबद्धता खातीर आवेदन नईखे क सकत। ऊ एगो अस्थायी प्रिंसिपल के साथे काम करत बाड़न आ हर साल कॉलेज से जुड़ाव के नवीकरण करे के मजबूर बाड़न। करीब 50 कॉलेज विज्ञापन के बाद नियमित प्रधानाध्यापक के चयन खातीर विश्वविद्यालय प्रशासन से चयन समिति के मांग कईले बाड़े, लेकिन मामला बहुत दिन से फाइल में फंसल बा। एह कॉलेजन के हालत देख के दोसरो कॉलेज प्रिंसिपल के चयन प्रक्रिया के आगे ना बढ़ा पावत बाड़े आ एह बारे में विश्वविद्यालय के स्टैंड के इंतजार करत बाड़े।

स्थायी प्रिंसिपल में योग्यता अड़चन

पहिला बेर साल 2004 में यूजीसी स्ववित्तपोषित कॉलेजन में स्थायी प्रिंसिपल बने के पात्रता तय कइलस। ओह घरी प्रिंसिपल के पात्रता के मानक सात साल के शिक्षक के मंजूरी आ पीएच.डी. 2010 में मंजूरी के अवधि बढ़ा के 15 साल कर दिहल गइल। अवधि बढ़ला के बाद योग्य प्राचार्य के खोज के लेके कॉलेज के सोझा एगो समस्या भी आईल। कॉलेज मंजूरी के अवधि कम करे के मांग भी उठवले, लेकिन मामला साकार ना भईल। कई गो कॉलेज अबहियो मानक प्रिंसिपल के तलाश में बाड़े।

महासचिव स्ववित्तपोषित महाविद्यालय प्रबंधन महासभा डॉ. सुधीर कुमार राय विश्वविद्यालय से स्थायी संबद्धता खातिर कॉलेज में स्थायी प्राचार्य होखल जरूरी शर्त बतवनी। विश्वविद्यालय से जुड़ल आधा से अधिका कॉलेजन में स्थायी प्रिंसिपल नइखे एहसे ई कॉलेज स्थायी संबद्धता खातिर आवेदन तक नइखे कर पावत। यूजीसी में कॉलेज के रजिस्ट्रेशन भी नइखे होखत, काहे कि ओहिजा रजिस्ट्रेशन खातिर भी आवेदन तबे कइल जा सकेला जब कॉलेज में स्थायी प्रिंसिपल होखे। एह समस्या के समाधान खातिर जल्दिए प्रबंधक महासभा के प्रतिनिधिमंडल कुलपति से भेंट करी।

 

 

 

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