विवाह पंचमी सोमार के मनावल जाई। मान्यता के अनुसार, मार्गशीर्ष महीना के पंचमी के भगवान राम अउर माता सीता के बियाह भइल रहे।अइसे में एह दिन श्रद्धालु विधि-विधान से सीताराम विवाह के आयोजन करिहें।
वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, एह बेर शुक्ल पंचमी तिथि के मान साँझ छह बज के आठ मिनट ले बा। उहवें उत्तराषाढ़ नक्षत्र दिन में तीन बज के 20 मिनट ले, पश्चात श्रवण नक्षत्र बा। अर्धरात्रि ले वृद्धि नामक शुभ योगो विद्यमान बा।
विवाह पंचमी के महत्व
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, भगवान राम अउर सीता के विवाह मार्गशीर्ष महीना के पंचमी तिथि के भइल रहे। एही दिन बड़ संख्या में लोग बियाह के दिन निर्धारित करेने। एह दिन संपूर्ण रामचरितमानस के पाठ करे से पारिवारिक सुख के प्राप्ति होला।
अइसे करीं भगवान राम अउर सीता के विवाह
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अुनसार, विवाह पंचमी के दिन सुबह उठकर स्नान करीं अउर साफ वस्त्र धारण करीं। एकरे बाद राम वियाह के संकल्प लेईं अउर श्रीराम अउर सीता के मूर्ति चाहे प्रतिमा स्थापित करीं। मूर्ति स्थापना के बाद भगवान राम के पीयर वस्त्र अउर माता सीता के लाल वस्त्र अर्पित करीं फिर भगवान राम अउर सीता के गठबंधन करीं। एकरे बाद विधि-विधान से भगवान राम अउर माता सीता के पूजा-अर्चना करीं। अंत में आरती के बाद प्रसाद बाँटीं।








