Akriti Vigya : लेखिका आकृति विज्ञा ‘अर्पण’ बनलीं पीएचडी होल्डर, किसान समस्या पs कइले बाड़ी महत्वपूर्ण रिसर्च

Akriti Vigya Achieves PhD in Botany

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गाेरखपुर। गोरखपुर से जुड़ल सक्रिय लेखिका आ कवयित्री आकृति विज्ञा ‘अर्पण’ वनस्पति शास्त्र में पीएचडी के उपाधि हासिल कइले बाड़ी। ऊ आपन रिसर्च किसानन के ज्वलंत समस्या पs केंद्रित रखले रहली। बायो फर्टिलाइजर के जादे इस्तेमाल से मिट्टी के उर्वरता पs पड़त असर उनका के हमेसा चिंतित करत रहे, जवन उनका रिसर्च के मुख्य विषय बनल।

आकृति, बनारस के प्रतिष्ठित यूपी ऑटोनोमस कॉलेज के वनस्पति विज्ञान विभाग में डॉ. विवेक सिंह के निर्देशन में आपन शोध पूरा कइली। तराई क्षेत्र में अरहर आ धान के खेत में काम करत समय ऊ समाज के बहुत नजदीक से समझली, जवन उनका साहित्यिक रचनन में झलकेला।

एगो शोधार्थी के रूप में आकृति कइयन गो प्रतिष्ठित संस्थानन में रिसर्च प्रस्तुत कइले बाड़ी आ कइयन गो शोध पत्र प्रकाशित कइले बाड़ी। संगही, उनकर दूगो वनस्पति विज्ञान के किताब प्रकाशनाधीन बा। विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट जोगदान खातिर उनका कइयन गो सम्मान, जइसे एक्सिलेंस अवार्ड मिल चुकल बा।

साहित्य के क्षेत्र में आकृति के पहचान खास बा। उनकर तीन किताब- लोकगीत सी लड़की, सुनो बसंती आ ललमुनिया- राष्ट्रीय आ अंतरराष्ट्रीय स्तर पs सराहल गइल बा। एह उपलब्धि खातिर उनका साहित्य में मानद डॉक्टरेट मिलल बा।

दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मेधावी छात्रा रह चुकल आकृति बीएससी, एमएससी आ बीएड इहवां से कइली। उनका गांव में खुसी के माहौल बा काहे कि गांव के पहिला लड़की पीएचडी हासिल कइले बाड़ी।

गांव के प्रधान आ शिक्षक लोग उनकर उपलब्धि के प्रेरणादायक बतावत बधाई दिहल। एह मौका पs कुलपति पूनम टंडन सहित कइयन गो प्रतिष्ठित लोग उनका के सुभकामना देलस।

मीडिया से बातचीत में आकृति कहली कि पीएचडी ना खाली ज्ञान बढ़ावे ला, बलुक इंसान के धैर्यवान बनावेला। ऊ आपन शोध स्वर्गीय दादी के समर्पित कइली आ देस के किसानन के श्रेय देली।

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