विश्व कविता दिवस : कुमार आशू के कलम से

Khabar Bhojpuri Desk

कविता आदमी के आदमियत के पहिचान हवे| एही से एह छौ रस वाला एह सृष्टि में कविता में नौ रस पावल जाला| लेकिन कविता कब आपन रूप पावेले अउर कब ओकर रहल सार्थक होला, ई जानल जाव कुमार आशू  के एगो सवैया के माध्यम से| कुमार आशू भोजपुरी के संगे संगे हिन्दियो के एगो जानल-मानल कवि बाने,

भाव के पाग में बोर के लोर से नेह के पाँति लिखे तब कविता..!
हारत टूटत जियरा के उकड़ाइ के आस भरे तब कविता..!
आपन पीर भुला मनई जब लागे ठठा के हँसे तब कविता..!
बस पढ़वइयन के नाहीं अनपढ़ के जुबान बने तब कविता..!!

–  कुमार आशू

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