नई दिल्ली। ईरान सरकार नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी के साढ़े सात साल के सजा सुनवले बा। एह फैसला के बाद एक बेर फेर नरगिस मोहम्मदी चरचा में आ गइल बाड़ी। ईरानी सरकार आ नरगिस मोहम्मदी के बीच पिछिला कइयन दशक से टकराव चल रहल बा।
उनका वकील के कहनाम बा कि एह नया सजा से ईरानी अधिकारियन के संगे चल रहल उनकर लड़ाई आउर तेज हो गइल बा। तs आईं जानल जाव कि आखिर नरगिस मोहम्मदी के बाड़ी आ काहे इनका ई सजा मिलल।
के हई नरगिस मोहम्मदी?
53 साल के नरगिस मोहम्मदी ईरान के जानल-मानल मानवाधिकार कार्यकर्ता बाड़ी आ नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित हो चुकल बाड़ी। ऊ खास तौर पs ईरान में औरतन पs हो रहल अत्याचार आ राजनीतिक दमन के खिलाफ आवाज उठावे खातिर पहचानल जाली।
ईरानी अधिकारी नरगिस पs आरोप लगावल लोग कि ऊ विरोध प्रदर्शन आयोजित करेली आ राज्य के खिलाफ प्रोपेगेंडा फइलावेली। हालांकि नरगिस आ उनकर समर्थक एह आरोपन के सिरा से खारिज करत बा लोग। ओह लोगन के कहनाम बा कि नरगिस के शांतिपूर्ण मानवाधिकार एक्टिविज्म खातिर सजा दिहल जा रहल बा।
नरगिस मोहम्मदी पेशा से इंजीनियर आ लेखिका बाड़ी। ओकरl संगही ऊ मानवाधिकार रक्षक केंद्र (डीएचआरसी) के उपाध्यक्षो बाड़ी। एह संगठन के स्थापना नोबेल पुरस्कार विजेता शिरीन एबादी कइले रहली। नरगिस बीतल एक दशक में से जादेतर समय जेले में बितवले बाड़ी।
नरगिस फाउंडेशन के मोताबिक, एह नया सजा के बाद नरगिस के खिलाफ कुल जेल सजा 44 साल तक पहुंच गइल बा। साल 2021 से ऊ राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ल आरोपन में 13 साल के सजा काट रहल बाड़ी।
साल 2023 में नरगिस मोहम्मदी के ईरान में औरतन पs हो रहल जुल्म के खिलाफ संघर्ष करे आ सबका खातिर मानवाधिकार आ आजादी के समर्थन करे खातिर नोबेल शांति पुरस्कार दिहल गइल। ओह समय ऊ तेहरान के जेल में बंद रहली, एकरा चलते उनकर लईका पुरस्कार लेवे खातिर सामने आइल रहे।
अब साढ़े सात साल के सजा काहे मिलल?
नरगिस मोहम्मदी के 12 दिसंबर 2025 के दिन मशहद शहर में मानवाधिकार वकील खोसरो अलीकोर्डी के खातिर आयोजित शोक सभा से गिरफ्तार कइल गइल। उनका पs भड़काऊ बयान देवे, नियम तुड़े वाला नारा लगावे आ शांति भंग करे के आरोप लगावल गइल।
अब तक नरगिस मोहम्मदी के 13 बेर गिरफ्तार कइल जा चुकल बा आ 5 बेर दोषी ठहरावल जा चुकल बा। ईरानी प्रशासन के एह कार्रवाई के दुनियाभर में मानवाधिकार संगठन आलोचना कs रहल बाड़ी सs आ नरगिस के रिहाई के मांग तेज हो रहल बा।







